
Health: थैलेसीमिया बीमारी....यह वंशानुगत रक्त विकारों का एक समूह है जो हीमोग्लोबिन के उत्पादन को प्रभावित करता है, लाल रक्त कोशिकाओं में प्रोटीन जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाता है। यह हीमोग्लोबिन के उत्पादन को नियंत्रित करने वाले जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है। थैलेसीमिया सबसे अधिक भूमध्यसागरीय, मध्य पूर्वी और दक्षिण पूर्व एशियाई मूल के लोगों में पाया जाता है।
थैलेसीमिया के दो मुख्य प्रकार हैं: अल्फा और बीटा थैलेसीमिया। अल्फा थैलेसीमिया तब होता है जब अल्फा ग्लोबिन के उत्पादन में समस्या होती है, जबकि बीटा थैलेसीमिया तब होता है जब बीटा ग्लोबिन के उत्पादन में समस्या होती है। थैलेसीमिया की गंभीरता हल्के से लेकर जानलेवा तक व्यापक रूप से भिन्न हो सकती है।
थैलेसीमिया के लक्षणों में थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना, पीलिया, हड्डियों में विकृति और तिल्ली का बढ़ना शामिल हो सकते हैं। थैलेसीमिया के लिए उपचार स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है और इसमें रक्त आधान, आयरन केलेशन थेरेपी और अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण शामिल हो सकते हैं। उचित इलाज से थैलेसीमिया से पीड़ित कई लोग लंबा और स्वस्थ जीवन जीने में सक्षम हैं।
थैलेसीमिया क्यों होता हैं ?
थैलेसीमिया यह एक अनुवांशिक रोग है और माता अथवा पिता या दोनों के जींस में गड़बड़ी के कारण होता हैं। रक्त में हीमोग्लोबिन 2 तरह के प्रोटीन से बनता है - अल्फा और बीटा ग्लोबिन। इन दोनों में से किसी प्रोटीन के निर्माण वाले जीन्स में गड़बड़ी होने पर थैलेसीमिया होता हैं।
थैलेसीमिया के लक्षण
• शरीर में पीलापन बना रहना व दांत बाहर की ओर निकल आना।
• आयु के अनुसार शारीरिक विकास नहीं होना।
• कमजोरी और उदासी रहना।
• सांस लेने में तकलीफ होना।
• बार-बार बीमार होना।
• सर्दी-जुकाम से हमेशा पीड़ित रहना।
• कई तरह के संक्रमण होना।
• शरीर में लौह की अधिकता।
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