
8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों की नजरें 8वीं वेतन आयोग (8th Pay Commission) की विकासशील घटनाओं पर लगी हुई हैं। सालों से बढ़ती महंगाई के बाद कई लाभार्थियों को वेतन और पेंशन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, उच्च फिटमेंट फैक्टर के कारण मूल वेतन, पेंशन और बकाया राशि में बढ़ोतरी की संभावना है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसके बावजूद कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच सैलरी बढ़ोतरी की संभावना ने उत्साह और उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
कर्मचारियों को कैसी होती है सैलरी में बढ़ोतरी?
फिटमेंट फैक्टर वेतन आयोग का एक महत्वपूर्ण घटक है। ये निर्धारित करता है कि मूल वेतन और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी। संशोधित वेतन की गणना मौजूदा मूल वेतन को फिटमेंट फैक्टर से गुणा करके की जाती है। अधिक फिटमेंट फैक्टर होने पर वेतन वृद्धि ज्यादा होती है। यह फैक्टर कर्मचारियों और पेंशनरों दोनों के वेतन में लागू होता है। पिछली उदाहरणों की बात करें तो छठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.92 था। इससे कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत मिली। उस समय न्यूनतम मूल वेतन 3,200 रुपये से बढ़कर 7,440 रुपये हो गया, जबकि उच्च स्तर पर अधिकतम मूल वेतन 30,000 रुपये से बढ़कर 90,000 रुपये तक पहुंच गया।
आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद
सातवें वेतन आयोग ने फिटमेंट फैक्टर 2.57 लागू किया। इसके अनुसार मूल वेतन और पेंशन को 2.57 से गुणा किया गया। न्यूनतम वेतन बढ़कर 18,000 रुपये और उच्चतम वेतन 2,50,000 रुपये तक पहुंच गया, जिससे उच्च स्तर के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 8वीं वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर 1.8 से 2.86 के बीच हो सकता है।
हालांकि यह केवल अनुमान हैं, क्योंकि आधिकारिक आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं। अगर सरकार इस रेंज के भीतर किसी भी आंकड़े को अपनाती है, तो यह कर्मचारियों और पेंशनरों के सभी ग्रेड में वेतन और पेंशन में पर्याप्त बढ़ोतरी का कारण बन सकता है। कुल मिलाकर, 8वीं वेतन आयोग के निर्णय से केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबे समय से इंतजार के बाद आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
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