
Digital Arrest: स्कैमर्स लोगों को धोखा देने के लिए नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। डिजिटल अरेस्ट इनमें से एक प्रमुख तरीका है,जिसमें शिकार को झांसा देकर उसे फंसाया जाता है। कई बार तो इसका पता पीड़ित को देर से चलता है। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति को लगभग एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया, और उसके खाते से 12 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम उड़ा ली गई।
बता दें कि,28 नवंबर को मुंबई के ईस्ट साइबर पुलिस स्टेशन में इस मामले की शिकायत दर्ज की गई। पीड़ित की उम्र 56 साल है और उसने बताया कि उसे लगभग एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया था। स्कैमर्स ने उसे डराया और अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।
कैसे शुरू हुआ धोखाधड़ी का खेल?
यह मामला इस साल जुलाई का है। पुलिस के अनुसार, 19 जुलाई को पीड़ित को एक कॉल आई, जिसमें उसका आधार नंबर वेरिफिकेशन के लिए मांगा गया। इसके बाद, एक व्यक्ति ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर WhatsApp वीडियो कॉल किया और पीड़ित को यकीन दिलाया कि वह असली पुलिस अधिकारी है।
एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा
पीड़ित को 12 अगस्त तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। इस दौरान उसे लगातार धमकियां दी गईं और बताया गया कि वह मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल है। स्कैमर्स ने पीड़ित से पैसे मांगे, यह कहते हुए कि उनका नाम केस से हटाने के लिए यह जरूरी है।
12 करोड़ से ज्यादा की रकम हुई ट्रांसफर
इस धोखाधड़ी के दौरान, पीड़ित ने कुल 12.81 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किए। जब नवंबर में यह मामला खुला, तब पीड़ित को एहसास हुआ कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है। इसके बाद, उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
कैसे बचें इस तरह की धोखाधड़ी से?
पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और यह माना जा रहा है कि इस तरह के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। इसलिए, नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान कॉल पर अपनी पर्सनल डिटेल्स साझा न करें। अगर कोई व्यक्ति आपको पुलिस के नाम पर डराता है, तो तुरंत इसकी जानकारी नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखें और अनजान कॉल्स से बचें।
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