
Sri sitaram Temple: तेलंगाना के करीमनगर जिले में स्थित श्री सीता रमा स्वामी मंदिर इन दिनों एक खास वजह से चर्चा में है। इस मंदिर में करीब 700 साल से जल रही अखंड ज्योति, जिसे नंदा दीपम कहा जाता है, आज भी लगातार जल रही है। यह अनोखी परंपरा सदियों से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। मंदिर में लगी एक घंटी पर लिखे शिलालेख के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण काकतीय वंश के अंतिम शासक Pratapa Rudrudu ने वर्ष 1314 में कराया था। उस समय के राजाओं ने इस नंदा दीपम को लगातार जलाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था की थी। इतिहासकारों के मुताबिक, उस दौर में प्रजा से वसूले गए कर से तेल खरीदा जाता था, ताकि दीपक कभी बुझ न सके।
स्थानीय लोग को मिली दीपक की जिम्मेदारी
समय के साथ राजाओं का शासन खत्म हो गया, लेकिन यह परंपरा आज भी जारी है। अब इस दीपक को जलाए रखने की जिम्मेदारी स्थानीय लोग और श्रद्धालु निभा रहे हैं। गांव के ही रामुलु और उनकी पत्नी प्रमिला ने इस दीप को जीवन भर जलाए रखने का संकल्प लिया है और वे लगातार इसके लिए तेल की व्यवस्था कर रहे हैं। हर साल मंदिर में श्रीराम नवमी का भव्य आयोजन होता है। इस मौके पर भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का आयोजन मंदिर के सामने बने 16 स्तंभों वाले कल्याण मंडप में किया जाता है। इस दौरान आसपास के गांवों और शहरों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
इस दीपक का दर्शन होता है शुभ
श्रद्धालु न केवल इस धार्मिक आयोजन में भाग लेते हैं, बल्कि 700 साल से जल रही इस अखंड ज्योति के दर्शन कर खुद को धन्य मानते हैं। लोगों का मानना है कि इस दीपक के दर्शन से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। यह अखंड ज्योति न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की एक जीवित मिसाल भी है, जो सदियों से बिना रुके जल रही है और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित कर रही है।
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