
नई दिल्ली: देश में कोरोना की दूसरी लहर ने कई राज्यों में गंभीर हालात बना दिये है. टीकाकरण अभियान का तीसरा चरण चल रहा है. राज्यों में वैक्सीन की कमी को लेकर लड़ाई चल रही है. कोरोना की लड़ाई में अब रूस की स्पूतनिक वी वैक्सीन साथ निभाने के लिए आ गई है. भारत में टीकाकरण के लिए कोवैक्सीन और कोविशील्ड नाम के दो कोरोनारोधी टीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में अब स्पुतनिक वी वैक्सीन का साथ भारत में वैक्सीनेशन में तेजी ला जा सकता है.जहां कोवैक्सीन पूरी तरह से स्वदेशी टीका है और इसे भारत बायोटेक कंपनी ने बनाया है. कोविशील्ड को सीरम इंस्टीट्यूट ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर बनाया गया है. वही स्पुतनिक वी वैक्सीन रूस की वैक्सीन है .
आइए जानते है कौन-सी वैक्सीन कितनी असरदार है
स्पुतनिक वी वैक्सीन
स्पुतनिक वी वैक्सीन को मॉस्को के गैमालेया इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित किया गया है. स्पूतनिक वी के डेवलपर्स का दावा है कि इसकी प्रभावशीलता 91.6फीसद है. वहीं, अन्य आंकड़ों में भी कोरोना के खिलाफ इस वैक्सीन को उच्च प्रभावशीलता की श्रेणी में रखा गया है. इसे विकसित करने के लिए सर्दी का कारण बनने वाले वायरस का उपयोग किया गया है. इस वायरस का उपयोग कोरोना वायरस के छोटे अंश को शरीर में डालने के लिए वाहक के रूप में किया गया है. और इसमें ऐसे बदलाव किए गए हैं कि शरीर में जाने के बाद वह लोगों को नुक़सान न पहुँचा सके.
इस वैक्सीन की ख़ासियत है कि इसे न्यूनतम दो से आठ डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर स्टोर किया जा सकता है. इस वजह से इस वैक्सीन का भंडारण करना आसान है. कोरोना के जेनेटिक कोड का एक अंश जब शरीर में जाता है तो इम्यून सिस्टम बिना शरीर को बीमार किए इस खतरे को पहचान कर उससे लड़ना सीख जाता है. टीका लगाने के बाद शरीर कोरोना वायरस के अनुरूप एंटीबॉडी का उत्पादन करना शुरू कर देता है. इसका अर्थ यह हुआ कि टीके के बाद शरीर का इम्यून सिस्टम वास्तव में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है.
वैक्सीन की कीमत 995.40रुपये प्रति खुराक रखी गई है. इसमें 5फीसद जीएसटी भी शामिल है. हालांकि यह संभावना है कि स्थानीय स्तर पर वैक्सीन बनने के बाद इसकी कीमत कम हो जाएगी. बता दे कि स्पुतनिक वी वैक्सीन की दूसरी खेप हैदराबाद पहुंच चुकी है.
कोवैक्सीन
इस वैक्सीन को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर)और भारत बायोटेक कंपनी ने मिलकर बनाया है. इसी कारण इस वैक्सीन को स्वदेशी कहा जा रहा है. इस वैक्सीन को कोविड-19के वायरस को निष्क्रिय कर बनाया गया है. वैक्सीन में निष्क्रिय कोविड-19वायरस उपलब्ध हैं, जो लोगों को बिना नुकसान पहुंचाए कोरोना संक्रमण के खिलाफ शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. जो संक्रमण के वक्त शरीर में एंटीबॉडीज बनाकर वायरस से लड़ने में मदद करता है.
कोवैक्सीन को मौसमी बुखार, रेबीज, जापानी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) जैसी बीमारियों में दिए जाने वाले पारंपरिक टीके की तरह ही बनाया गया है.कोवैक्सीन ने दूसरे अंतरिम एनालिसिस में 78प्रतिशत प्रभावकारिता और गंभीर कोविड -19डिजीज के खिलाफ 100प्रतिशत प्रभाव दिखाया है.भारत में बायोटेक ने कोवैक्सीन की कीमत राज्य सरकारों के लिए 600रुपये और निजी अस्पतालों के लिए 1200रुपये प्रति वैक्सीन तय की है.
कोविशील्ड
ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कोविशील्ड नाम से बना रही है. कोविशील्ड को वायरल वेक्टर प्लेटफॉर्म का उपयोग करके तैयार किया गया है, जो एक बिल्कुल अलग तकनीक है. कोविशील्ड को चिम्पांजी में पाए जाने वाले आम सर्दी के संक्रमण के एडेनोवायरस का इस्तेमाल कर बनाया गया है. एडेनोवायरस की आनुवंशिक सामग्री एसएआरएस-सीओवी-2कोरोनावायरस के स्पाइक प्रोटीन की तरह ही है. स्पाइक प्रोटीन के जरिये ही वायरस शरीर की कोशिका में प्रवेश करता है.
कोविशिल्ड वैक्सीन शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली को कोरोना संक्रमण से बचने के लिए प्रतिरोधक तंत्र बनाने में मदद करता है. कोविशील्ड को इबोला वायरस से लड़ने वाली वैक्सीन की तरह ही बनाया गया है.कोविशिल्ड की कुल प्रभावकारिता 70प्रतिशत है. हालांकि यह 90प्रतिशत से अधिक हो सकता है, जब एक महीने बाद फुल डोज दे दी जाएगी. इसी के साथ सीरम वैक्सीन की कीमत राज्य सरकारों को 400रुपये, केंद्र सरकार को 150रुपये और निजी अस्पतालों को 600रुपये में दी जाएगी.
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