D Gukesh ऐसे नहीं बने विश्व चैंपियन, माता-पिता के संघर्ष और बलिदान देख आंखों से नहीं रुकेंगे आंसू

D Gukesh ऐसे नहीं बने विश्व चैंपियन, माता-पिता के संघर्ष और बलिदान देख आंखों से नहीं रुकेंगे आंसू

World Chess Champion: भारत के 18वर्षीय शतरंज खिलाड़ी डी गुकेश ने हाल ही में चीन के डिंग लिरेन को हराकर विश्व शतरंज चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। इस शानदार जीत के साथ वह शतरंज के इतिहास में सबसे कम उम्र के विश्व चैंपियन बने हैं। उनकी यह सफलता केवल उनकी मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि उनके माता-पिता के त्याग और समर्पण का भी फल है।

माता-पिता का संघर्ष

गुकेश की सफलता में उनके माता-पिता का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उनके पिता रजनीकांत,जो एक ईएनटी सर्जन हैं, उन्होंने 2017में अपनी मेडिकल प्रैक्टिस छोड़ दी, ताकि वह बेटे की शतरंज यात्रा में पूरा समर्थन दे सकें। रजनीकांत ने सीमित संसाधनों के बावजूद गुकेश को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर प्रदान किया। उनकी मां, पद्मा, जो एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने परिवार की वित्तीय जिम्मेदारियां संभालते हुए बेटे को हर कदम पर प्रोत्साहित किया।

गुकेश के पहले कोचविष्णु प्रसन्ना ने कहा था, "गुकेश के माता-पिता ने बहुत कुछ त्याग किया है। उनके पिता ने अपना करियर लगभग छोड़ दिया, और मां ने परिवार की जिम्मेदारियां संभाली, ताकि बेटे को पूरा समर्थन मिल सके।"

शतरंज में गुकेश का सफर

गुकेश की शतरंज यात्रा 2013में सात साल की उम्र में शुरू हुई थी। 2017में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मास्टर का खिताब जीता, और 2019में 12साल 7महीने की उम्र में ग्रैंडमास्टर बन गए। इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की, जैसे 2024में कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतना, शतरंज ओलंपियाड में भारत को स्वर्ण पदक दिलवाना और सिंगापुर में विश्व चैंपियनशिप जीतना।

सपोर्ट की कमी के बावजूद सफलता

गुकेश को इस सफर में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें सबसे बड़ी चुनौती सपनारसीपकी कमी थी। उन्होंने अपनी यात्रा को जारी रखने के लिए माता-पिता की 'क्राउड-फंडिंग' का सहारा लिया। इसके बावजूद, वह भारत के नंबर एक शतरंज खिलाड़ी बन गए।

गुकेश की कहानी न केवल उनकी असाधारण क्षमता की है, बल्कि ये उनके परिवार के समर्पण और संघर्ष की भी है। वह अब भारतीय शतरंज के भविष्य के सितारे बन चुके हैं, और उनकी यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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