Virat Kohli Controversy: भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज की ओर से किए गए दावों पर अब विराट कोहली के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर सफाई दी है। प्रवक्ता ने फलाहारी महाराज के दावों को पूरी तरह गलत, निराधार और तथ्यहीन बताया है। प्रवक्ता ने कहा कि विराट कोहली संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण करते हैं। उनका संत प्रेमानंद महाराज से जुड़ाव पूरी तरह व्यक्तिगत और आध्यात्मिक है। प्रवक्ता ने साफ किया कि कोहली को लेकर किए गए अन्य दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उन्हें सिरे से खारिज किया जाता है।
फलाहारी महाराज ने की अपील
दरअसल, दिनेश फलाहारी महाराज ने सोमवार को संत प्रेमानंद महाराज को पत्र लिखकर उनसे बेलवन आश्रम छोड़कर गोवर्धन आने की अपील की थी। पत्र में उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और आश्रम में कथित तौर पर दो गुटों के बीच विवाद होने का दावा किया। इसी पत्र में फलाहारी महाराज ने आरोप लगाया कि एक गुट ने भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये देकर प्रेमानंद महाराज के दरबार में बुलाया था। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद संत प्रेमानंद महाराज की प्रसिद्धि देशभर में तेजी से बढ़ी। हालांकि, विराट कोहली के प्रवक्ता ने इस दावे को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है।
फलाहारी महाराज ने लगाया गंभीर आरोप
फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में बेलवन आश्रम के आसपास यमुना डूब क्षेत्र की जमीनों की कथित खरीद-फरोख्त का भी आरोप लगाया। उन्होंने कुछ लोगों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जमीनों की बिक्री का दावा किया। इसके अलावा उन्होंने आश्रम में साधु वेश में कथित तौर पर सक्रिय लोगों पर गंभीर आरोप लगाए और गुमशुदा बच्चों की किडनी बेचे जाने जैसे दावे भी किए। इन आरोपों की जांच के लिए उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की है। फलाहारी महाराज ने सरकार से संत प्रेमानंद महाराज को जेड प्लस सुरक्षा देने की मांग भी की। साथ ही उन्होंने प्रेमानंद महाराज से विवादों से दूर रहकर गोवर्धन में साधना करने की अपील की।
कोहली के प्रवक्ता ने दी सफाई
वहीं, विराट कोहली के प्रवक्ता ने मीडिया से अपील की है कि किसी भी दावे को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उसकी पूरी तरह जांच और तथ्यात्मक पुष्टि की जाए। प्रवक्ता ने कहा कि बिना सत्यापन के ऐसी बातों को आगे बढ़ाने से बचना चाहिए और केवल प्रमाणित जानकारी ही लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए।
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