Shani Shingnapur Temple: बेहद रहस्यमयी है शनिदेव का ये मंदिर, आज भी घरों में नहीं लगाए जाते ताले

Shani Shingnapur Temple:  बेहद रहस्यमयी है शनिदेव का ये मंदिर, आज भी घरों में नहीं लगाए जाते ताले

Shani Shingnapur Temple: भगवान शनि जिनके बारे में ऐसा कहा जाता है कि अगर अपने किसी भक्त पर मेहरबान होते है तो रंक से राजा बना देते हैं वहीं अगर शनि देव की टेढ़ी पड़ जाए तो राजा से रंक बनते भी देरी नहीं लगती। शनि देव के देश भर में कई मंदिर हैं लेकिन आज हम आपको शनिदेव के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जो बेहद ही रहस्यमयी है। जिस गांव में ये मंदिर मौजूद है वहां के बारे में कहा जाता है कि जहां घरों में न ही दरवाजे हैं न ही कोई घरो में ताले लगाता है।

 भगवान शनि जिसे न्याय का देवता और कर्मों का प्रधान माना जाता है। संपूर्ण भारत में शनिदेव के कई सारे मंदिर हैं। कई मंदिर बेहद ही रहस्यमयी हैं। उन्हीं रहस्यमयी मंदिरों में से एक है महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिंगणापुर का शनि मंदिर। ये मंदिर शनि भगवान का सजीव मंदिर है। इसे शनि देव का जन्म स्थान माना जाता है। शनि शिंगणापुर मंदिर के बारे में ये मान्‍यता है कि यहां शनिदेव स्‍वयंभू हैं। यहां शनिदेव की पूजा काले पत्‍थर के रूप में की जाती है। कहा जाता है कि यहां शनिदेव काले पत्थर के रूप में स्‍वयं प्रकट हुए थे।इस जगह पर शनिदेव की पूजा एक काले पत्थर के रूप में की जाती है। ये पत्थर खुले आसमान के नीचे है।

खुले आसमान के नीचे रखने की कहानी

दरअसल, धार्मिक कथा के अनुसार एक बार शिंगणापुर गांव भयंकर बाढ़ की वजह से डूबने की कगार पर आ गया था। उस वक्त पानी में लोगों ने एक विचित्र पत्थर बहता देखा, जब पानी कम हुआ तो एक चरवाहे ने उसी पत्थर को पेड़ पर देखा। उसने उसे नीचे उतारकर तोड़ने का प्रयास किया तो उसमें से खून निकलने लगा। चरवाहा डर गया। रात में चरवाहे को शनि देव ने सपने में दर्शन दिए और उस पत्थर की प्राण प्रतिष्ठा करने को कहा। शनि देव ने कहा कि मंदिर में छत की कोई आवश्यकता नहीं है। सारा आकाश मेरी छत है। यही कारण है कि छाया पुत्र के मंदिर में छत नहीं है।

घरों में न ही दरवाजे हैं और न लगाता कोई ताले

यहां की सबसे खास बात ये है कि यहां पर आज तक किसी प्रकार की कोई चोरी नहीं हुई है। यहां बैंकों तक में दरवाजे पर ताले नहीं लगते हैं। ऐसा कहते हैं कि यहां पर कोई चोरी करने की हिम्‍मत नहीं कर सकता और यदि कोई ऐसी जुर्रत करता भी है तो शनिदेव स्‍वयं उसे दंड देते हैं।

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