
Special News: देशभर में शादियों का सीजन जारी है। हिंदू धर्म में कई ऐसी रिती-रिवाज है जिनका महत्व काफी खास होता है। जिसमें से एक है मांग में सिंदूर लगाना। हिंदू धर्म में सिंदूर लाल रंग का होता है लेकिन कई राज्यों में पीला और नारंगी रंग का सिंदूर लगाया जाता है। लेकिन क्या आप लोगों को इस पीले और नारंगी सिंदूर के पीछे की वजह जानते है अगर नहीं तो चलिए आपको इसके पीछे की वजह बताते है।
दरअसल हिंदू धर्म कोई भी शादी बिना सिंदूर लगाए अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शादी को सफल करने के लिए मांग में सिंदूर भरना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं सुहागिन की मांग का प्रतीक सिंदूर माना जाता है। लेकिन धर्म ग्रंथों में नारंगी या पीले रंग के बारे में अलग से वर्णन किया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब हनुमान जी को पता चला कि भगवान श्री राम को माता सीता द्वारा सिंदूर लगाने से काफी प्रसन्न मिलती है तो उन्होंने अपने पूरे शरीर को नारंगी सिंदूर से रंग लिया।
पीले सिंदूर का धार्मिक महत्व
वहीं पीले रंग का संबंध नवग्रह गुरू ग्रह और भगवान विष्णु से माना गया है। पीले रंग का सिंदूर जीवन की रोशनी को दर्शाता है। किसी भी धार्मिक कार्य में पीला रंग पहनने और पीले रंग का इस्तेमाल करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मांग में सिंदूर लगाने से सौभाग्य बढ़ता है और इसके कई प्रतीकात्मक भी अर्थ है।
क्यों लगाया जाता है पीला सिंदूर?
एक मान्यता के अनुसार, शादी विवाह के खत्म होते होते सुबह होने लगती है और शादी के इस सिंदूर की तुलना सूर्योंदय के समय होने वाली हल्के पीले या नारंग रंग की लालीमा से की जाती है। इसलिए शादी विवाह में अक्सर इस रंग का सिंदूर लगाया जाता है। सत्यनारायण भगवान विष्णु जी को पीला रंग अति प्रिय माना गया है।
Leave a comment