
Parivartini Ekadashi:साल भर में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं। भाद्रमाह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी, पद्मा या जलझूलनी एकादशी कहा जाता है। वहीं 25 सितंबर को परिवर्तनी एकादशी (Parivartini Ekadashi) का त्योहार मनाया जाएगा। यह एक हिन्दू धार्मिक त्योहार है जिसे भगवान विष्णु की पूजा के रूप में मनाया जाता है। पुराण के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलने के समय प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं, इस अवधि में भक्तिभाव एवं विनयपूर्वक उनसे जो कुछ भी मांगा जाता है वे अवश्य प्रदान करते हैं। इस एकादशी की पूजा और व्रत को विशेष फलदाई माना गया है।
पूजाविधि:
1. इस दिन, भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
2. विष्णु भगवान की मूर्ति को साफ पानी और गंगाजल से स्नान कराना चाहिए।
3. भगवान विष्णु के उपासना में तुलसी की पत्तियों का उपयोग करना चाहिए।
4. तुलसी पत्तियों को विष्णु भगवान की पूजा में छिलकर और प्रणाम करके प्रयोग करें।
5. विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र या भगवद गीता का पाठ करना भी उपयुक्त होता है।
6. अन्न दान और दरिद्रों की सेवा करने का प्रयास करें।
7. रोज़ा रखने वालों को इस दिन भोजन करने की अनुमति होती है।
महत्व:
1.परिवर्तनी एकादशी का त्योहार भगवान विष्णु को समर्पित है और इसका महत्वपूर्ण संदेश है कि भगवान की भक्ति और साधना के माध्यम से आत्मा को परिवर्तित किया जा सकता है।
2.इस दिन को उपासक अपने पापों से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं और भगवान की कृपा को अपने जीवन में बढ़ावा दे सकते हैं।
शुभ मुहूर्त
• परिवर्तनी एकादशी तिथि: 25 सितंबर 2023 (अनुसरण करें व्यक्तिगत पंचांग के आधार पर)
• परिवर्तनी एकादशी पूजा का समय: सुबह 6:07 बजे से दोपहर 1:29 बजे तक (समय विभिन्न स्थानों पर अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग का पालन करें)
इस त्योहार पर भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद, भक्तों को प्रसाद बांटना और दरिद्रों की सेवा करना महत्वपूर्ण होता है। इसके माध्यम से भक्ति और सेवा के माध्यम से आत्मा की शुद्धि और स्पिरिचुअल विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।
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