
Rahul Gandhi On India America Trade Agreement: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर इन दिनों खूब चर्चा हो रही है। 9 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दी गई समयसीमा खत्म हो जाएगी। यानी 9 जुलाई के बाद ट्रंप के द्वारा ऐलान किए गए रेसिप्रोकल टैरिफलागू हो जाएगा। अगर समय से पहले भारत-अमेरिका के ट्रेड डील फाइनल नहीं होता है तो रेसिप्रोकल टैरिफ भारत पर भी लागू हो सकता है। अब इस मामले पर भारत में राजनीति शुरु हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को क्लियर किया कि भारत अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते एफटीए पर किसी भी तय समयसीमा के दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी व्यापार समझौते पर तभी हस्ताक्षर करेगा जब वह पूरी तरह अंतिम रूप ले चुका हो और देश के हित में हो। उन्होंने नेशन फर्स्ट का इशारा करते हुए कुछ बातें बताई हैं। गोयल के बयान पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आई है।
राहुल गांधी की पीएम मोदी पर हमला
पीयूष गोयल के बयान के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि 'पीयूष गोयल जितना चाहें छाती पीट लें, लेकिन मेरे शब्दों पर ध्यान दें, मोदी, ट्रंप की टैरिफ समयसीमा के आगे झुक जाएंगे।' कांग्रेस पार्टी भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने के राष्ट्रपति ट्रंप के दावे पर भी जवाब न देने को लेकर प्रधानमंत्री पर हमलावर है। अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के बारे में पूछे जाने पर पीयूष गोयल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुक्त व्यापार समझौता तभी संभव है, जब दोनों पक्षों को फायदा हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित हमेशा सर्वोच्च होना चाहिए। इसे ध्यान में रखते हुए अगर कोई सौदा होता है तो भारत इसके लिए तैयार है।
9 जुलाई की समयसीमा तय की है ट्रंप ने
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 9 जुलाई की समयसीमा तय की है। भारत सरकार, अमेरिका के साथ ही यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड, ओमान, चिली और पेरू के साथ भी व्यापार समौते पर चर्चा कर रही है। पीयूष गोयल ने कहा कि उनकी फिलहाल व्यापार समझौते को लेकर वॉशिंगटन जाने की कोई योजना नहीं है। भारतीय वार्ताकार राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में अमेरिका से व्यापार समझौते पर बात कर रहा भारतीय प्रतिनिधि दल वापस लौट आया है। कृषि और ऑटोमोबाइल जैसे मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है।
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