
PT Usha On Vinesh Phogat: पेरिस ओलंपिक से भारत के लिए कई बुरी खबर सामने आई। भारत के हिस्से इसबार मात्र 6 मेडल ही आ पाया। हालांकि, ओलंपिक में जिस एथलिट की सबसे अधिक चर्चा रही, वो हैं विनेश फोगाट। पेरिस ओलंपिक का समापन हो गया है लेकिन भारत के लोगों की नजरें अभी भी एक मेडल की आस में टकटकी लगाए हुए है। हालांकि, विनेश फोगाट जिस तरह से फाइनल से बाहर हो गई, इसपर कई सवाल उठाए गए। वजन बढ़ने का जिम्मेदार इनके सपोर्ट स्टाफ और डॉक्टरों को बताया गया। अब इस मामले पर भारतीय ओलिंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा का बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि एथलीट्स के वेट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी हर एथलीट और उसके कोच की होती है। गौरतलब है कि विनेश फोगाट फाइनल से पहले 100 ग्राम वजन अधिक होने के कारण अंक तालिका में अंतिम पायदान पर चली गई थी। इसके बाद लोगों ने इसका जिम्मेदार उनके सपोर्ट स्टाफ, कोच और मेडिकल टीम को बताया था।
क्या कहा पीटी उषा ने?
विनाश फोगाट को फाइनल खेलने से पहले ही अधिक वजन होने के कारण डिसक्वॉलिफाई कर दिया गया।इसके साथ बाद कुछ लोगों ने IOA की मेडिकल टीम और इसमें भी खासकर डॉ दिनशॉ पादरीवाला और उनकी टीम को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहा था। इन बातों को भारतीय ओलिंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने खारिज करते हुए कहा कि मेडिकल टीम को दोषी ठहराना ठीक नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि ‘कुश्ती, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, जूडो जैसे खेलों में एथलीट्स के वेट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी हर एथलीट और उसके कोच की है, न की मेडिकल स्टाफ की। पीटी उषा ने आगे कहा कि डॉ दिनशॉ पादरीवाला और उनकी टीम के प्रति घृणा अस्वीकार्य है। किसी परिणाम पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को देख लेना चाहिए। पीटी उषा ने डॉ दिनेशॉ के बारे में बताते हुए कहा कि ‘आईओए की ओर से नियुक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डॉ. दिनशॉ पारदीवाला और उनकी टीम को खेलों से कुछ महीने पहले बोर्ड में लाया गया था। उनका काम इवेंट के दौरान और बाद में एथलीटों की रिकवरी और चोट प्रबंधन में सहायता करना था।
मेडल आने की आश बांकी
गौरतलब है कि विनेश फोगाट सिल्वर मेडल की मांग लेकर खेलों के कोर्ट में पहुंची थी। जहां सुनवाई पूरी हो गई है। 13 अगस्त को इस मामले में कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। कोर्ट में विनेश फोगाट ने कहा कि जब सही वजन के साथ वो फाइनल में पहुंटी थी, तो उन्हें सिल्वर मेडल मिलना ही चाहिए। हालांकि, विनेश फोगाट ने पहले कोर्ट के समक्ष मैच को रोकने की मांग रखी थी लेकिन कोर्ट ने उनके मांग को खारिज कर दिया था।
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