Oppenheimer गीता विवाद पर ‘महाभारत’ के ‘श्रीकृष्ण’ ने रखी अपनी राय, फिल्म को लेकर कह दी बड़ी बात

Oppenheimer गीता विवाद पर ‘महाभारत’ के ‘श्रीकृष्ण’ ने रखी अपनी राय, फिल्म को लेकर कह दी बड़ी बात

Oppenheimer Controversy: क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म 'ओपेनहाइमर'दुनियाभर में कमाल दिखा रही है। इस फिल्म की भारत में काफी सराहना हो रही है। वहीं फिल्म के एक सीन के लेकर काफी विवाद भी हो रहा है। दरअसल, फिल्म के इंटीमेट सीन के दौरान भगवत गीता का श्लोक पढ़ा गया है जिसको लेकर भारत में आपत्ति जताई जा रही है। वहीं अब इस पूरे विवाद पर महाभारत में श्रीकृष्ण का रोल कर फेमस हुए एक्टर नीतीश भारद्वाज ने अपना रिएक्शन दिया है।

श्लोक को ठीक से समझना चाहिए

ईटाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक नीतीश भाद्वाज ने कहा, "गीता मूल रूप से युद्ध के मैदान के बीच में कर्तव्य की भावना सिखाती है। हमारी लाइफ का स्ट्रग्ल भी मुख्य रूप से इमोशनल, युद्ध के मैदान हैं। श्लोक 11.32में अर्जुन को एक योद्धा के रूप में अपना कर्तव्य निभाने के लिए भी कहा गया था, जो कि बुराई से लड़ना है। कृष्ण के पूरे श्लोक को ठीक से समझना चाहिए। वह कहते हैं कि मैं शाश्वत काल हूं जो हर चीज को मार डालूंगा।इसलिए हर कोई मर जाएगा भले ही आप उन्हें न मारें। इसलिए अपना कर्तव्य निभाएं।"

शायद अपने आविष्कार पर पछतावा हुआ था

उन्होंने आगे बताया, "जब ओपेनहाइमर ने परमाणु बम बनाया और इसका इस्तेमाल जापान की ज्यादातर आबादी को मारने के लिए किया गया तो वह खुद सवाल कर रहे थे कि क्या उन्होंने अपना कर्तव्य ठीक से निभाया! उनके फेमस इंटरव्यू में उन्हें रोते हुए दिखाया गया था, जिसका मतलब है कि उन्हें शायद अपने आविष्कार पर पछतावा हुआ था। उन्होंने शायद देखा था कि उनका आविष्कार भविष्य में मानव जाति को नष्ट कर देगा और उन्हें शायद पछतावा था। फिल्म में इस वर्स के इस्तेमाल को ओपेनहाइमर के इमोशनल स्टेट से भी समझा जाना चाहिए। एक साइंटिस्ट अपनी क्रिएशन के बारे में 24x 7x365दिन सोचता है, चाहे वह कुछ भी कर रहा हो। उसका माइंड स्पेस पूरी तरह से उसकी क्रिएशन में समा जाता है और फिजिकल एक्ट सिर्फ एक नेचुरल मैकेनिकल एक्ट है।"

लोगों से की अपील

उन्होंने आगे कहा, "मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे ओपेनहाइमर की लाइफ के महत्वपूर्ण क्षणों के इस इमोशनल पहलू के बारे में सोचें। क्या वह सही साबित नहीं हुए हैं कि अब हम सभी विस्फोटक टेक्नीक का इस्तेमाल कर अपनी ही जाति को मारते हुए देखते हैं। आज स्थिति कुरूक्षेत्र जैसी ही है। यही वजह है कि ब्राह्मणों और क्षत्रियों ने जानबूझकर इसका प्रचार नहीं किया। युद्ध का वेद – धनुर्वेद। संयुक्त राष्ट्र को परमाणु निरस्त्रीकरण को गंभीरता से लागू करना चाहिए। नोलन का मैसेज जोरदार और क्लियर है।"

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