
Tamilnadu Politics: तमिलनाडु की सियासत में गुरुवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK के दिग्गज नेता ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) ने बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया। यह कदम 2026के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की रणनीति के लिए करारा झटका माना जा रहा है। OPS ने अपने करीबी सलाहकार पंरुती एस. रामचंद्रन और सहयोगियों के साथ तीन घंटे की मैराथन बैठक के बाद यह फैसला लिया। इससे पहले, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मुलाकात की इच्छा जताई थी, लेकिन समय न मिलने से उनकी नाराजगी बढ़ गई थी। तमिलनाडु में बीजेपी की राह पहले से कठिन थी, और अब OPS का यह कदम उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।
स्टालिन से मुलाकात और सियासी अटकलें
OPS के NDA से अलग होने से पहले गुरुवार सुबह उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री और DMK नेता एमके स्टालिन से हुई, जो मॉर्निंग वॉक के दौरान हुई थी। इस मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी, क्योंकि इसके कुछ ही घंटों बाद OPS ने गठबंधन तोड़ने की घोषणा कर दी। यह दृश्य 26साल पहले की उस घटना की याद दिलाता है, जब 1999में AIADMK की तत्कालीन नेता जयललिता ने सोनिया गांधी के साथ चाय पर मुलाकात के बाद NDA से नाता तोड़ा था, जिसके चलते अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक वोट से गिर गई थी। क्या स्टालिन के साथ OPS की यह मुलाकात भी कोई नई सियासी स्क्रिप्ट लिख रही है? कयास लगाए जा रहे हैं कि OPS अब DMK या अभिनेता विजय की TVK के साथ गठजोड़ कर सकते हैं।
बीजेपी की रणनीति पर असर
OPS का NDA से अलग होना बीजेपी के लिए बड़ा नुकसान है, खासकर थेवर समुदाय के 10-12%वोटों को देखते हुए, जो दक्षिणी तमिलनाडु में प्रभावशाली है। AIADMK के साथ बीजेपी के रिश्ते पहले ही तनावपूर्ण थे, और अब OPS की बगावत ने उनकी राह को और पथरीला कर दिया है। OPS ने कहा कि उनकी समिति अब स्वतंत्र रूप से राज्य का दौरा करेगी और भविष्य के गठबंधन का फैसला परिस्थितियों के आधार पर होगा। सियासी जानकार मानते हैं कि OPS, TTV दिनाकरण जैसे AIADMK के बागी नेताओं के साथ मिलकर नया समीकरण बना सकते हैं। तमिलनाडु की सियासत में यह नया मोड़ 2026के चुनाव को और रोमांचक बना सकता है।
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