
नई दिल्ली: कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों के जीवन में हाहाकार मचा दिया है. कोरोना के इस काल में लोगों के मन में ये सवाल भी उठ रहे है कि क्या एक बार कोरोना होने के बाद फिर से रिइंफेक्शनका खतरा हो सकता है या नहीं? कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच अब इसके संक्रमित की भी खबरें आने लगी हैं. यानी अब ऐसे भी मामले आ रहे हैं जिसमें एक बार ठीक होने के बाद व्यक्ति कोरोना से दोबारा संक्रमित हो रहा है.
रीइंफेक्शन को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने एक अहम बात कही है कि अगर वायरस से ठीक होने वाले किसी व्यक्ति में पांच महीनों में एंटीबॉडी कम हो जाती है, तो उसे फिर से कोविड-19 हो सकता है.लेकिन जैसे-जैसे दुनिया भर में एक लहर के बाद दूसरी लहर जारी है और भारत में दिन-प्रतिदिन कोरोना के ज्यादा मामले दर्ज हो रहे हैं, ऐसे हालात में जो सवाल पहले के मुकाबले ज्यादा अहम है.
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक स्टडीमेंयहभीकहा गया है कि जब कोई एसएआरएस-कोओवी-2वायरस से संक्रमित होता है तो शरीर उसकी मेमोरी को बनाए रखने में सक्षम होती है और एंटीबॉडी बनाता रहता है. अगर दोबारा संक्रमण होता भी है तो शरीर वायरस से लड़ने के लिए तैयार रहता है जैसा कि खसरा और चिकनपॉक्स के मामले में होता है.कोरोना की पहली लहर के दौरान दोबारा इन्फेक्शन का खतरा न के बराबर था, जबकि नई लहर के दौर में इस खतरे से इनकार नहीं किया जा रहा है.
अगस्त 2020 मेंकोरोना के दोबारा संक्रमण की पहली सूचना मिली थी.कैम्ब्रिज में हुई एक स्टडी में कहा गया कि कोविड-19 संक्रमित 1300 व्यक्तियों में से 58 दूसरी बार संक्रमित हुए. कोरोना की पहली लहर के दौरान दोबारा इन्फेक्शन का खतरा न के बराबर था, जबकि नई लहर के दौर में इस खतरे से इनकार नहीं किया जा रहा है.
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