शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये 7 चीजें, भगवान शिव हो जाएंगे अप्रसन्न

शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये 7 चीजें, भगवान शिव हो जाएंगे अप्रसन्न

Mahadev: देवो के देव महादेव कहे जाने वाले भगवान शिव को सोमवार का दिन समर्पित होता है। इस दिन शिव भक्त भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कहा जाता है कि इन दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत, शमीपत्र आदि कई शुभ चीजें चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। वहीं शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव को तुलसी, हल्दी और सिन्दूर समेत ये 7 चीजें कभी नहीं चढ़ानी चाहिए। चलिए आपको इसका कारण बताते है।

हल्दी

शिवलिंग पर कभी भी हल्दी नहीं चढ़ाई जाती क्योंकि हल्दी का संबंध स्त्रियों से माना जाता है और शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है। ऐसे में शिव जी की पूजा में हल्दी का प्रयोग करने से पूजा का फल नहीं मिलता है। यह भी माना जाता है कि हल्दी की तासीर गर्म होती है, जिसके कारण इसे शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना जाता है।

कुमकुम या सिन्दूर

इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं इसलिए भगवान शिव को सिन्दूर चढ़ाना अशुभ माना जाता है।

टूटा चावल

शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान भोलेनाथ को कभी भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाए जाते क्योंकि यह अपूर्ण होते हैं और अशुद्ध माने जाते हैं।

तुलसी

शिवपुराण के अनुसार जलंधर नामक राक्षस का वध भगवान शिव के हाथों हुआ था। जलंधर को वरदान था कि उसकी पत्नी की पवित्रता के कारण उसे कोई भी पराजित नहीं कर सकेगा। लेकिन जलंधर को मरने के लिए भगवान विष्णु को जलंधर की पत्नी तुलसी का सतीत्व भंग करना पड़ा। अपने पति की मृत्यु से क्रोधित होकर तुलसी ने भगवान शिव का तिरस्कार कर दिया। इसीलिए शिव को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।

काले तिल

भगवान शिव को काले तिल या तिल से बनी कोई भी चीज नहीं चढ़ानी चाहिए क्योंकि माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति भगवान विष्णु के मैल से हुई है।

केतकी का फूल

केतकी के फूल ने ब्रह्मा के कहने पर भगवान शंकर से झूठ बोला था, जिससे भगवान शंकर बहुत क्रोधित हुए। इसके बाद भगवान शंकर ने केतकी को श्राप दिया कि वह कभी भी भगवान शिव की पूजा में इस्तेमाल नहीं की जायेगी।

शंख जल

कहा जाता है कि भगवान शिव ने राक्षस शंखचूड़ का वध किया था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है जो भगवान विष्णु का भक्त था। इसलिए भगवान विष्णु की पूजा शंख से की जाती है, शिव की नहीं।

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