Eye Flu: आई फ्लू में लापरवाही छीन सकती है आपकी आंखों की रोशनी, हो जाएं सावधान

Eye Flu: आई फ्लू में लापरवाही छीन सकती है आपकी आंखों की रोशनी, हो जाएं सावधान

EYE FLU: मानसून में कंजक्टिवाइटिस यानी आई फ्लू के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक सेल्फ लिमिटेड डिजिज होता है। कंजंक्टिवाइटिस के हर केस में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती है, कई बार ये घरेलू इलाज से भी ठीक किया जा सकता है। लेकिन कई बार इस संक्रमण का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है, जिसका समय से इलाज करना बेहद जरूरी होता है। इस संक्रमण के चलते आंखो में लाल पन, दर्द और जलन जैसी कई समस्या उत्पन्न हो जाती है।

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि आई फ्लू होने पर कुछ लोगों ने खुद ही आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिनमें स्टेरॉयड की अधिक मात्रा होती है। इससे कुछ समय के लिए आई फ्लू से आराम तो मिल जाता है, लेकिन लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करना आंखों के लिए गंभीर पैदा कर सकती है। इसलिए आई फ्लू का सही से इलाज कराना बेहद जरूरी होता है।

स्टेरॉयड का इस्तेमाल       

आई फ्लू का आमतौर पर कोई नियमित इलाज नहीं है, लेकिन कुछ स्थितियों में बीमारियों की कंडीशन देखते हुए डॉक्टर्स कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स वाले आई ड्रॉप्स डालने की सलाह देते हैं। इससे एडेनोवायरल कंजेक्टिवाइटिस इंफेक्शन खत्म तो हो जाता है, लेकिन कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स आई ड्रोप हर किसी के लिए नहीं होती हैं। इसके इस्तेमाल को लेकर कई सावधानियों की आवश्यकता होती है। अगर इसका ज्यादा या बिना जरूरत के इस्तेमाल किया जाए, तो संक्रमण का खतरा और भी बढ़ सकता है।

खतरनाक साबित हो सकता है स्टेरॉयड

आई फ्लू के करीब 20-30 प्रतिशत केस में पॉजिटिव बैक्टीरियल कल्चर देखने को मिलता है।जो बताते हैं, कि ये सुपरएडेड बैक्टीरियल इंफेक्शन है। डॉक्टरों का कहना है, कि स्टेरॉयड वाले आई ड्रॉप्स का ज्यादा इस्तेमाल कई तरह के खतरा को पैदा करता है। ऐसे लोग, जो लंबे समय तक कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का इस्तेमाल करते हैं, उनमें ग्लूकोमा और मोतियाबंद का खतरा हो सकता है। इससे आंखों की रोशनी जाने का खतरा भी रहता है। कंजंक्टिवाइटिस से अगर आप भी संक्रमित हो चुके है, तो प्रयास करें ज्यादातर घरेलू नुसका अपनाए। जैसे कि आंखो को ठंडे पानी से सेकाई करें, आँखो को बार-बार छूने से बचे, जिससे आई फ्लू ठीक हो सकता है।

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