India Lashesh Out On China:भारत और चीन के बीच लद्दाख को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। चीन के विदेश मंत्रालय ने लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने पर पहले भी आपत्ति जताते हुए भारत के फैसले को एकतरफा बताया था। बीजिंग का कहना रहा है कि लद्दाख के कुछ हिस्से चीन के क्षेत्रीय दावों से जुड़े हैं। हालांकि, भारत ने चीन के इन दावों को स्वीकार नहीं किया है और लद्दाख को देश का अभिन्न हिस्सा बताया है।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने पर प्रतिक्रिया दी थी। चीन ने आरोप लगाया था कि भारत ने पश्चिमी क्षेत्र में चीन के क्षेत्रीय दावों से जुड़े इलाके को अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में शामिल किया है। बीजिंग ने भारत के इस कदम का विरोध करते हुए कहा था कि इससे सीमा विवाद और जटिल हो सकता है। चीन का यह रुख भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का हिस्सा रहा है।
भारत ने लद्दाख पर चीन के दावों को किया खारिज
भारत सरकार का रुख इस मुद्दे पर स्पष्ट रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और इन क्षेत्रों के प्रशासनिक पुनर्गठन का फैसला भारत का आंतरिक मामला है। भारत ने चीन की ओर से क्षेत्रीय संप्रभुता को लेकर उठाए गए सवालों पर आपत्ति जताई है। नई दिल्ली का कहना है कि चीन को भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत भी होती रही है।
सीमा विवाद के बीच क्यों अहम है लद्दाख का मुद्दा?
लद्दाख भारत और चीन के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र है। दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर मतभेद रहे हैं और सीमा पर शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम माना जाता है। भारत लगातार सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर देता रहा है। वहीं, चीन की ओर से क्षेत्रीय दावों से जुड़े बयान आने पर दोनों देशों के संबंधों में तनाव की आशंका बढ़ जाती है। फिलहाल, लद्दाख को लेकर किसी भी नए बयान या कूटनीतिक घटनाक्रम का आकलन आधिकारिक वक्तव्यों और प्रमाणित रिपोर्टों के आधार पर किया जाना चाहिए।
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