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न लाइन, न कार्ड...चेहरा बन जाएगा आपका बोर्डिंग पास, जेवर एयरपोर्ट पर नई हाई-टेक सुविधा से आसान होगा सफर

न लाइन, न कार्ड...चेहरा बन जाएगा आपका बोर्डिंग पास, जेवर एयरपोर्ट पर नई हाई-टेक सुविधा से आसान होगा सफर

Jewar Airport Face Recognition:उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित जेवर एयरपोर्ट, जिसे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है, अब यात्रियों के लिए एक खास सुविधा लाने की तैयारी में है। 30 अक्टूबर 2025 को उद्घाटन के ठीक पहले, यहां फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को पूरी तरह से एकीकृत किया जा रहा है। इस तकनीक से एंट्री से लेकर बोर्डिंग गेट तक यात्रियों को केवल अपना चेहरा दिखाना होगा,यानी न बोर्डिंग पास की झंझट, न ID कार्ड की टेंशन। यह सुविधा डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो यात्रा को तेज, सुरक्षित और संपर्क-रहित बना देगी।

डिजिटल-1 का पहला एयरपोर्ट

जेवर एयरपोर्ट का निर्माण कार्य अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका है, और यह भारत का पहला ऐसा विमानक्षेत्र होगा जहां पूरी प्रक्रिया चेहरे पर आधारित होगी। एयरपोर्ट की आंतरिक फिनिशिंग तेजी से पूरी हो रही है और यह डिजिटल-1 (Digital-1) अवधारणा के साथ विकसित किया जा रहा है। यहां यात्रियों को एंट्री गेट पर ही फेस रिकग्निशन मशीन के सामने खड़ा होना होगा, जो उनकी पहचान को तुरंत वेरिफाई कर देगी। इसके बाद सिक्योरिटी चेक, चेक-इन काउंटर और बोर्डिंग गेट पर भी यही तकनीक काम करेगी। परिणामस्वरूप, यात्रा का समय 50% तक कम हो सकता है, और लंबी कतारों की समस्या हमेशा के लिए अलविदा कह दी जाएगी। 

इसके अलावा यह सुविधा डिजी यात्री (Digi Yatra) ऐप से जुड़ी हुई है, जो पहले से ही दिल्ली, बैंगलोर और हैदराबाद जैसे एयरपोर्ट्स पर उपलब्ध है। जेवर में इसे और उन्नत रूप दिया गया है, जहां आधार-आधारित वेरिफिकेशन के बाद यात्री की फोटो क्लिक हो जाएगी। फिर, एयरपोर्ट के हर टचपॉइंट पर कैमरे चेहरे को स्कैन कर लाइन क्लीयर कर देंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक न केवल तेजी लाएगी, बल्कि सुरक्षा को भी मजबूत करेगी, क्योंकि इससे फर्जी पहचान की संभावना लगभग शून्य हो जाएगी। 

कैसे काम करेगी फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी?

  1. एंट्री पर:एयरपोर्ट पहुंचते ही गेट पर फेस स्कैनर से पहचान होगी। बोर्डिंग पास या ID की जरूरत नहीं।
  2. सिक्योरिटी चेक:बैग स्कैन के साथ चेहरा मैच होगा, जो सिस्टम से लिंक्ड होगा।
  3. बोर्डिंग गेट:फ्लाइट बोर्डिंग के समय केवल चेहरा दिखाएं, और गेट खुल जाएगा।

यह सिस्टम इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) के डिजिटल जर्नी पास मानकों पर आधारित है, जो वैश्विक स्तर पर एयरपोर्ट्स में क्रांति ला रहा है। जेवर में इसे लागू करने से NCR क्षेत्र के लाखों यात्रियों को फायदा होगा, खासकर जो इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकल्प तलाश रहे हैं।

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