
Justice Suryakant CJI: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। बता दें, जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस भूषण आर. गवई का स्थान लिया, जो रविवार को रिटायर हुए थे। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 14-15महीनों का होगा, जो 9फरवरी 2027तक चलेगा।
शपथ ग्रहण समारोह
शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया, जहां राष्ट्रपति मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत नियुक्ति की प्रक्रिया का पालन करते हुए जस्टिस सूर्यकांत को शपथ दिलाई। यह नियुक्ति परंपरा के अनुसार सीनियरिटी के आधार पर की गई, जहां निवर्तमान CJI गवई ने अपने उत्तराधिकारी की सिफारिश की थी। समारोह में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित हुआ, क्योंकि नेपाल, भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस और श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीशों, जजों और पूर्व जजों समेत छह देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। यह भारत की वैश्विक न्यायिक सहयोग को दर्शाता है।
समारोह के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि लंबित मामलों को कम करना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने हाई कोर्ट्स से परामर्श करने, जिला और अधीनस्थ अदालतों की चुनौतियों को हल करने, और पांच, सात तथा नौ जजों वाली संविधान पीठें गठित करने की योजना बताई। उन्होंने मध्यस्थता को मजबूत करने पर जोर दिया, जिसमें राज्यों के बीच विवादों के लिए सामुदायिक मध्यस्थता शामिल है। एआई के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि यह प्रक्रियात्मक कार्यों में मददगार हो सकता है, लेकिन फैसले जजों द्वारा ही लिए जाएंगे।
जस्टिस सूर्यकांत का करियर
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके परिवार में कानून की कोई परंपरा नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से ऊंचाइयां हासिल कीं। उन्होंने 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली और हिसार जिला अदालत में प्रैक्टिस शुरू की। बाद में चंडीगढ़ शिफ्ट होकर संवैधानिक, सिविल और सेवा मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। 2000 में हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने, 2001 में सीनियर एडवोकेट नामित हुए और जनवरी 2004 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने। अक्टूबर 2018 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए, और मई 2019 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 2024 से वे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमिटी के चेयरपर्सन हैं।
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