अमेरिकी मंत्री के दावे को भारत ने नकारा, विदेश मंत्रालय ने दिया जोरदार जवाब

अमेरिकी मंत्री के दावे को भारत ने नकारा, विदेश मंत्रालय ने दिया जोरदार जवाब

 
MEA news: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते  को लेकर उपजे विवाद पर विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंध हैं और उन्होंने हमेशा राजनयिक नियमों के अनुसार एक-दूसरे को आपसी सम्मान के साथ संबोधित किया है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के उस दावे को भारत ने "सटीक नहीं" बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप से सीधे बात न करने के कारण समझौता नहीं हो सका। रणधीर जायसवाल ने कहा, "यह कहना सही नहीं है कि बातचीत किसी व्यक्तिगत संवाद की कमी की वजह से रुकी है। दोनों पक्ष पिछले साल फरवरी से कई दौर की बातचीत कर चुके हैं और हम एक संतुलित समझौते के बेहद करीब हैं। 
 
विदेश मंत्रालय ने किया स्पष्ट
 
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 2025 में अब तक आठ बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। भारत दोनों पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते के लिए प्रतिबद्ध है।  लुटनिक के इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% के भारी टैरिफ का कारण व्यापारिक हितों के बजाय ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी है. दावों के अनुसार, पीएम मोदी द्वारा व्यक्तिगत हस्तक्षेप न करने को ट्रंप ने 'अपमान' के रूप में देखा और इसी के चलते भारत पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए।  
 
लुटनिक ने किया था ये दावा
 
भारत की प्रतिक्रिया अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के उस बयान के कुछ घंटों बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) इसलिए अटक गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समझौते को अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्यक्तिगत रूप से फोन नहीं किया।  ऑल-इन पॉडकास्ट को दिए एक इंटरव्यू में लुटनिक ने कहा, 'सब कुछ तैयार था, बस प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति को फोन करना था।  लेकिन वे ऐसा करने में असहज थे।  इसलिए मोदी ने कॉल नहीं किया.' लुटनिक की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ट्रंप ने इस हफ्ते नई दिल्ली पर दबाव बढ़ाते हुए चेतावनी दी कि अगर भारत ने रूस से तेल आयात कम नहीं किया तो टैरिफ और बढ़ाए जा सकते हैं।   

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