
उत्तर प्रदेश की जानी मानी कवियत्री मधुमिता शुक्ला को हत्याकांड के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व नेता और मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को 20 साल बाद जेल से रिहा किया जाएगा। इन दोन की रिहाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही की जा रही है। 66 साल के अमरमणि की रिहाई के संबंध में उत्तर प्रदेश कारागार विभाग ने आदेश भी जारी कर दिया है।
कारागार विभाग के आदेश में क्या लिखा
उत्तर प्रदेश के कारागार प्रशासन की ओर से जो आदेश जारी किया गया है उसमे कहा गया है कि अमरमणि और मधुमणि त्रिपाठी में से किसी को अगर किसी और मुकदमे में जेल में रखना ज़रूरी न हो तो गोरखपुर के जिला मजिस्ट्रेट के विवेक से दो जमानतें और उतनी ही धनराशि का एक मुचलका लेकर दोनों को जेल से रिहा कर दिया जाए. आदेश में अमरमणि और मधुमणि की आयु, जेल में बिताई गई सजा की अवधि और अच्छे जेल को आधार बनाकर बाकी बची हुई सजा को माफ कर दिया गया है। मधुमणि त्रिपाठी ने 20 साल 2 महीने और 18 दिन जेल में बिताए है। वहीं अमरमणि त्रिपाठी ने 20 साल एक महीने और 19 दिन कैद रहकर काटे हैं।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, 9 मई को उत्तर प्रेदश की राजधानी लखनऊ के निशातगंज स्थित पेपर मिल कॉलोनी में एक हत्या हुई थी मशहूर महिला कवियित्री मधुमिता शुक्ला की। महिला कवियित्री के घर में गोली मारकर की गई हत्या का मामला थोड़ी ही देर में सनसनी फैल गई थी। शव का पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि मधुमिता गर्भवती थीं। अमरमणि त्रिपाठी और मधुमिता के बीच संबंध होने की जानकारी सामने आई। मामला राजनीतिक विवाद का मुद्दा बना तो तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पहले CID जांच का आदेश दिया। लेकिन विपक्ष के तेज होते हमलों के दबाव में मामले को CBI को ट्रांसफर कर दिया गया। CBI ने अपनी जांच में अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी, भतीजे रोहित चतुर्वेदी और गोली मारने वाले संतोष राय को दोषी माना था. अक्टूबर 2007 में चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए कोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी।
मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में CBI जांच के दौरान आरोपी अमरमणि त्रिपाठी पर गवाहों को धमकाने के आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद इस मुकदमें को यूपी से बाहर देहरादून के फास्ट ट्रैक कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था। लेकिन छानबीन में सामने आया कि अमरमणि और मधुमिता शुक्ला के संबंध से नाराज मधुमणि त्रिपाठी ने हत्या की साजिश रची थी। इस मामले में मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ी और सज़ा होने के बाद भी अमरमणि त्रिपाठी के राजनीतिक रसूख को लेकर निधि शुक्ला ने बड़े बड़े नेताओं और अधिकारियों को चिट्ठी लिखने के अलावा लगातार संघर्ष किया था।
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