'पूरा सिस्टम दलितों के खिलाफ', संविधान दिवस के कार्यक्रम में लाइट जाने पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला

'पूरा सिस्टम दलितों के खिलाफ', संविधान दिवस के कार्यक्रम में लाइट जाने पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला

Rahul Gandhi On Constitution Day Event: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी आज संविधान दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए तालकटोरा स्टेडियम पहुंचे। इस दौरान जब राहुल गांधी दलितों और जाति जनगणना की बात कर रहे थे। तभी अचानक वहां लाइट चली गई। लेकिन कुछ देर इंतजार करने के बाद लाइट आ गई। जिस पर उन्होंने कहा कि ये कितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन मुझे जो बोलना है वो बोलूंगा। 

कार्यक्रम के बीच लाइट गई

दरअसल,आज ही के दिन 26 नवंबर को हमारे देश का संविधान लागू हुआ था। जिसें आज 75 साल पूरे हो चुके है। इस अवसर पर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस की तरफ से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया हैं। लेकिन कार्यक्रम शुरु होने के कुछ देर बाद यहां लाइट चली गई। बता दें, इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी मौजूद थे।

लेकिन जब राहुल दलितों और जाति जनगणना की बात कर रहे थे। तभी अचानक वहां लाइट चली गई। कुछ देर इंतजार करने के बाद जब लाइट आई तो उन्होंने कहा कि ये कितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन मुझे जो बोलना है वो बोलूंगा।

माइक बंद होने पर क्या बोले राहुल गांधी?

कार्यक्रम के दौरान जब लाइट गई तो उन्होंने कहा 'जो भी इस देश में 3 हजार साल से दलितों की,आदिवासियों की बात करता है, उसका माइक ऑफ हो जाता है। लाइट जाने पर कई लोग आए, कहने लगे जाकर बैठ जाइए। लेकिन मैंने कहा कि मैं खड़ा रहूंगा। मैंने कहा कि माइक जितना ऑफ करना है करो, मैं खड़ा रहूंगा।'

पूरा सिस्टम पिछड़ों-दलितों के खिलाफ

राहुल गांधी आगे कहते है कि हर दिन आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्ग का युवा डॉक्टर-इंजीनियर, जर्नलिस्ट और अफसर बनने का सपना देखा है। लेकिन देश का पूरा सिस्टम पिछड़ों-दलितों-आदिवासियों के खिलाफ खड़ा है। हिंदुस्तान की 200 सबसे बड़ी कंपनियों की लिस्ट में एक दलित-ओबीसी-पिछड़ा नहीं मिलता।

संविधान की किताब पर बोले राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा 'मोदी कहते हैं कि गांधी, फूले, शिवाजी की सोच संविधान की किताब में मिलेगी। क्या सावरकर की सोच इसमें दिखती है? ये सत्य और अहिंसा की किताब है। संविधान में कहीं नहीं लिखा कि झूठ बोलकर सरकार चलाया जाए। किसी को मारने, काटने की बात भी नहीं लिखी। यहां रोहित वेमुला की तस्वीर लगी है. वो भी बोलना चाहते थे लेकिन उनको मार दिया गया।'  

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