PARKINSON DISEASE: तेजी के साथ बढ़ रही है युवाओं में पार्किंसंस की बीमारी, जानें लक्षण

PARKINSON DISEASE: तेजी के साथ बढ़ रही है युवाओं में पार्किंसंस की बीमारी, जानें लक्षण

Health: पार्किंसन नाम की एक बीमारी युवाओं मे बड़ी ही तेजी के साथ बढ़ रही है। बता करें इसके खतरे की तो यह अक्सर उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है दरअसल पार्किंसन की बीमारी (Parkinson's disease) एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो धीमी तरीके से बढ़ती है और अक्सर उम्र बढ़ने के साथ जुड़ी होती है। इस बीमारी में न्यूरॉन ट्रांसमिटर डोपामीन उत्पादित करने वाले क्षेत्र में कमी होती है जो कि शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद करता है।

पार्किंसन की बीमारी के लक्षणों में शामिल होते हैं: शकिंति, गतिरोध, चलने में कठिनाई, शरीर का अस्तित्व का हानि और अक्षमता। इन लक्षणों के अलावा, रोगी को बार-बार खुशी या दुखी महसूस करने में भी कठिनाई होती है और वे भावनात्मक संतुलन की कमी के कारण भी पीड़ित होते हैं।

यह बीमारी ज्यादातर 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती है, लेकिन कई बार इसे कम उम्र में भी देखा जाता है। इसका इलाज बीमारी के लक्षणों को कम करने में मदद करता है, लेकिन इसका कोई ठीक करने वाला इलाज अभी तक नहीं है। इसलिए, इस बीमारी का प्रबंधन एक संयमित और

पार्किंसंस की बीमारी के लक्षण

पार्किंसन की बीमारी के लक्षण निम्नलिखित होते हैं:

  • शकिंति: शरीर के किसी भी हिस्से की खिंचाव, गुमनाम झटके या कम्पन शकिंति का एक मुख्य लक्षण होता है।

 

  • गतिरोध: रोगी को अपनी गतिविधियों को शुरू करने में कई बार कठिनाई होती है और वह स्लो और स्थिर चलता है।
  • चलने में कठिनाई: चलने में कठिनाई एक और लक्षण है जो पार्किंसन के रोगियों में देखा जाता है। यह उनकी गतिविधियों में कमी के कारण होता है।
  • शरीर का अस्तित्व का हानि: पार्किंसन के रोगियों के शरीर का अस्तित्व बदल जाता है जिससे वे अक्षम हो जाते हैं। उन्हें जमना भी मुश्किल होता है।
  • अक्षमता: रोगी को अपने शरीर के कुछ हिस्सों को नहीं चला पाने का अनुभव होता है जैसे कि उनकी हाथों या पैरों में।
  • भावनात्मक संतुलन की कमी: पार्किंसन के रोगियों में भावनात्मक संतुलन की कमी भी होती है। वे बार-बार खुशी या दुखी महसूस करने में कठिनाई होती हैं।

 

युवा में ज्यादा बढ़ रहा है पार्किंसंस की बीमारी

हाल के अध्ययनों में, युवाओं में पार्किंसन की बीमारी के मामले में वृद्धि हो रही है। इस विकास के कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं: जीवनशैली के बदलते प्रभाव: आजकल की जीवनशैली में उच्च तनाव, अपूर्ण आहार, कम शारीरिक गतिविधि और अत्यधिक उपयोग तंबाकू और अन्य नशीली पदार्थों का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।

आनुवंशिक प्रभाव: पार्किंसन की बीमारी एक आनुवंशिक रोग होता है और कुछ लोगों में यह रोग परिवार के अन्य सदस्यों में भी होता है।

चिकित्सा प्रगति: उन्नत चिकित्सा प्रणालियों के कारण, बहुत से लोग अपनी बीमारी को बेहतरीन ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं और अधिक लंबे समय तक उससे नहीं पीड़ित होते हैं। इसलिए, युवाओं में पार्किंसन के रोग के मामलों का तेजी से बढ़ता हुआ नंबर इसके कुछ मात्रात्मक कारणों के अलावा भी हो सकता है।

Leave a comment