
Sonam Wangchuk: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक करीब 6 महीने बाद जेल से रिहा हो चुके हैं। इसी कड़ी में राजधानी दिल्ली में उन्होंने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं बल्कि पूरे लद्दाख के लोगों की है और वह इसे तभी जीत मानेंगे जब लद्दाख का असली भला होगा।
लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि, "मैं या तो अदालत में जीत मिलने पर या 12 महीने बाद जेल से बाहर आने का इंतजार कर रहा था। मैं 12 महीने जेल में बिताने और बाहर आकर अपने और अपनी पत्नी (सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि जे आंगमो) के साथ हुए सभी अन्याय की भयावह कहानियां साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार था। मुझे अचानक मेरे घर से उठाकर इस जेल में डाल दिया गया, और मुझे कई दिनों तक, एक सप्ताह से अधिक समय तक, अपने परिवार या वकीलों को फोन करने का भी मौका नहीं दिया गया या फिर मेरी पत्नी, जो भारी सुरक्षा व्यवस्था के कारण पत्रकारों से मिलकर अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर सकीं, और कैसे वह चुपके से दिल्ली गईं और अदालत के दरवाजे खटखटाए, और कैसे दो-तीन सप्ताह तक दिल्ली की सड़कों पर उनकी कारों का पीछा करने वाले लोगों और मोटरसाइकिल सवारों के साथ लुका-छिपी का खेल चलता रहा।
मुझे इन सब बातों से मुक्ति मिल गई है- सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक ने कहा कि यह सब किसी फिल्मी दृश्य जैसा था। यह एक भयानक कहानी है कि कैसे मेरे वकीलों को कुछ भी भेजना इतना मुश्किल बना दिया गया था। इसके अलावा, सब कुछ बढ़िया था। जेल, कर्मचारी और लोग। वे अपने नियमों और अनुशासन आदि का पालन करने के बावजूद बहुत ईमानदार और दयालु थे। मुझे खुशी है कि मुझे उन बातों में नहीं पड़ना पड़ेगा। लेकिन अब सरकार की ओर से मिले इस सहयोग से मुझे इन सब बातों से मुक्ति मिल गई है। मुझे पूरी उम्मीद है कि बातचीत की प्रक्रिया जारी रहेगी। और अगर वे असफल होते हैं और हमें फिर से दूसरे तरीके अपनाने पड़ते हैं, तभी हमें उन बातों को साझा करने की आवश्यकता होगा।
Leave a comment