
Jammu Kashmir Election 2024: जम्मू कश्मीर के लोग एकबार फिर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने की तैयारी में लगने वाले हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के द्वारा जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करने वाले हैं। करीब 10 साल बाद एकबार फिर जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होंगे। साल 2019 में धारा 370 हटन के बाद जम्मू कश्मीर की रुपरेखा पूरी तरह से बदल गई है। जैसे कि राज्य का परिसीमशन होने के बाद विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ गई है। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव में आरक्षित सीटों की भी घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही 1990 के दौर में जिन कश्मीरी पड़ितों का नरसंघार किया गया था, उनके लिए भी दो सीटें आरक्षित की गई हैं। बता दें, जम्मू कश्मीर में परिसीमन के बाद विधानसभा की 90 सीटें हो गई हैं। इसके अलावा लदाख को जम्मू कश्मीर स पहले ही अलग कर दिया गया है।
जम्मू कश्मीर कितना बदला है?
भारत की आजादी से जिस रुप और रंग में जम्मू कश्मीर रहता रहा, उसे 5 अगस्त 2019 को पूरी तरह से बदल दिया गया। 5 अगस्त को सिर्फ धारा 370 ही हटाया गया बल्कि जम्मू कश्मीर से लदाख को अलग दिया गया और दोनों को ही केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। हालांकि, लदाख में विधानसभा का कोई भी प्रावधान लागू नहीं किया गया।
जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया और राज्य का प्रमुख उपराज्यपाल को बना दिया गया। यानी मुख्यमंत्री जरुर होंगे लेकिन सरकार का मुखिया एलजी होगा। आसान भाषा में, पुलिस, जमीन और पब्लिक ऑर्डर एलजी के अधिकार में होगा तो वहीं, अन्य सभी विभाग सीएम के हिस्से आएंगी।
विधानसभा सीटों में हुई बदलाव
धारा 370 हटने से पहले संयुक्त जम्मू कश्मीर में कुल 111 सीटें थीं। इन 111 सीटों में से जम्मू के हिस्से 37, कश्मीर के हिस्से 46, लद्दाख के हिस्से 4 और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के हिस्से 24 सीटें आती थी। हालांकि, धारा 370 हटने के बाद प्रदेश का पूरा नक्शा बदल गया है। अब जम्मू में 43, कश्मीर में 47 और पीओके में 24 सीटों का प्रावधान किया गया है। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव में कुल 90 सीटों पर ही चुनाव होगा।
अगर हम रीजन के हिसाब से बात करें तो जम्मू रीजन में सांबा, कठुआ, राजौरी, किश्तवाड़, डोडा और उधमपुर में एक-एक सीट बढ़ाई गई है। वहीं, कश्मीर रीजन में कुपवाड़ा जिले में एक सीट बढ़ाई गई है।जम्मू के सांबा में रामगढ़, कठुआ में जसरोता, राजौरी में थन्नामंडी, किश्तवाड़ में पड्डेर-नागसेनी, डोडा में डोडा पश्चिम और उधमपुर में रामनगर सीट नई जोड़ी गईं हैं।वहीं, कश्मीर रीजन में कुपवाड़ा जिले में ही एक सीट बढ़ाई गई है। कुपवाड़ा में त्रेहगाम नई सीट होगी। अब कुपवाड़ा में 5 की बजाय 6 सीटें होंगी। इससे पहले लोगों की यह शिकायत होती थी कि अवैध तरीके से कश्मीर रीजन में अधिक विधानसभी सीट रखा गया था। क्योंकि, जम्मू क्षेत्र में हिंदुओं की संख्या अधिक थी।
कश्मीरी पंड़ितों को मिला अधिकार?
लगभग तीन दशक से अपने ही मिट्टी से विस्थापित हुए कशमीरी पंड़ितों के लिए भी केंद्र सरकार ने कई प्रावधान किए हैं। विधानसभा चुनाव में कश्मीरी पंड़ितों के लिए दो सीटें आरक्षित रखी गई हैं। यानी उपराज्यपाल को यह शक्ति दी गई है कि वो दो कश्मीरी पंड़ित और एक पीओके से विस्थापित व्यक्ति को विधानसभा के लिए नामित करें। यहां प्रवाधान है कि दो में से एक कश्मीरी पंड़ित, महिला होनी चाहिए। इसके साथ ही अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 16 सीटें रिजर्व की हैं. इनमें से एससी के लिए 7 और एसटी के लिए 9 सीटें रखी गईं हैं।
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