Karwa Chauth 2023: इन्होंने रखा था सबसे पहले करवा चौथ का व्रत, जाने कैसे हुई शुरुआत

Karwa Chauth 2023: इन्होंने रखा था सबसे पहले करवा चौथ का व्रत, जाने कैसे हुई शुरुआत

Karwa Chauth 2023: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं का व्रत माना जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती है।लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि करवा चौथ का यह व्रत सबसे पहले किसने रखा? मान्यता है कि सबसे पहले यह व्रत शक्ति स्वरुपा देवी पार्वती ने भोलेनाथ के लिए रखा था।इसी व्रत के प्रभाव से उन्हे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई थी। करवा चौथ से जुड़ी कई धार्मिक कथाएंप्रचलित हैं। प्राचीन कथाओं में तो करवा चौथ को करवा नाम की पतिव्रता स्त्री से जोड़कर देखा जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में करवा नाम की एक पतिव्रता स्‍त्री थी। एक बार उसका पति नदी में स्‍नान करने गया था। उसी समय एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। जब उसने मदद के लिए करवा को पुकारा। तब करवा ने अपनी सतीत्‍व के प्रताप से मगरमच्‍छ को कच्‍चे धागे से बांध दिया और यमराज के पास पहुंची। करवा ने यमराज से पति के प्राण बचाने और मगर को मृत्‍युदंड देने की प्रार्थना की।  इसके बाद यमराज ने प्रसन्न होकर करवा के पति को जीवनदान मिला और मगरमच्‍छ को मृत्‍युदंड दिया।

जब देवताओं की पत्नियों ने रखा था करवाचौथ का व्रत

वहीं एक दूसरी कथा के अनुसार, जब देवताओं और राक्षसों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ा। जब दानव देवताओं पर हावी हो गए  और लाख उपायों के बावजूद भी देवताओं को सफलता नहीं मिली। तभी ब्रह्मदेव ने सभी देवताओं की पत्नियों को करवा चौथ का व्रत करने की सलाह दी। जिसके प्रभाव  से  उनके पति दानवों से यह युद्ध जीत जाएंगे। इसके बाद देवियों ने कार्तिक माह की चतुर्थी के दिन सभी ने व्रत किया और अपने पतियों के लिए युद्ध में सफलता की कामना की। कहा जाता है कि तब से करवा चौथ का व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई।

महाभारत में भी है मिलता है इस व्रत का प्रसंग

वहीं एक और कथा काफी प्रचलित है जिसके अनुसार, एक बार अर्जुन नीलगिरी पर्वत पर तपस्‍या करने गए थे। उसी दौरान पांडवों पर कई तरह के संकट आ गए। तब द्रोपदी ने भगवान श्रीकृष्‍ण से पांडवों के संकट से उबरने का उपाय पूछा। इसपर कन्‍हैया ने उन्‍हें कार्तिक माह की चतुर्थी के दिन करवा का व्रत करने को कहा। इसके बाद द्रोपदी ने यह व्रत किया और पांडवों को उस संकट से मुक्ति मिल गई।

इस कारण पड़ा इस व्रत का नाम करवा चौथ

करवा चौथ के दिन कार्तिक मास की चतुर्थी होने के कारण करवा और चौथ मिलने से इसका नाम करवा चौथ पड़ा।इस तरह मां करवा वह पहली महिला हैं, जिन्होंने सुहाग की रक्षा के इस व्रत को न केवल पहली बार किया बल्कि इसकी शुरुआत भी की थी। इस व्रत के बारे में यह भी कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण जी के कहने पर द्रौपदी ने अर्जुन के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था।इस व्रत का उल्लेख वराह पुराण में भी देखने को मिलता है।

Leave a comment