करवा चौथ के दिन महिलाएं क्यों करती है 16 श्रृंगार? यहां जानें हर श्रृंगार का महत्व

करवा चौथ के दिन महिलाएं क्यों करती है 16 श्रृंगार? यहां जानें हर श्रृंगार का महत्व

KARWA CHAUTH 2023: सुहागन महिलाएं आज करवा चौथ का त्योहार मना रही है। लाखों सुहागिन महिलाएं अपनी शादीशुदा जिंदगी की और अपने पति की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन का व्रत करेंगी। शाम को चांद के निकलने के बाद उसकी पूजा और उसे अर्घ्य देकर महिलाएं अपना करवा चौथ का व्रत पूरा करती हैं। इस दिन वह 16 श्रृंगार भी करती है। तो आज हम आपको इस 16 श्रृंगार के महत्तव के बारे में बताएं।

16 श्रृंगार और इनका महत्व

1. सिंदूर: सुहागन महिलाओं के लिए सिंदूर महत्व होता है। इसी से सुहागन महिलाओं की पहचान होती है। इससे लगाने से पति की लंबी उम्र होती है।

2. लाल बिंदी: इसके बादमाथे पर लगने वालीलाल बिंदी का भी कापी महत्व होता है। इससे पवित्र माना जाता है और इससे भी संहागन महिला की पहचान होती है।

 3. काजल: आंखों में लगने वाले काजल से सुंदरता के साथ- साथ मंगल दोष से मुक्ति मिलती है।

4. मेहंदी: हाथों की सुंदरता बढ़ाने वाली मेहंदी काफी शुभ मानी जाती है। इससे पति के प्रेम में बढ़ोतरी होती है।

5. लाल चूड़ियां: सुहागन महिलाओं के लिए लाल-हरी चूड़ियां काफी महत्व होती है। इससे खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

6. मंगलसूत्र: मंगलसूत्र पति-पत्नी को रिश्ते में बांधने वाला एक धागा है। जो दोनों को बुरी नजर से बचाते है।

7. नथ: नाक में पहने जाने वाली नथ काफी शुभ होती है। इससे बुध का दोष दूर होता है।

8. गजरा: गजरा बालों की सौभा के साथ सुगंध और सुंदरता के लिए पहना जाता है।

9. बेंदी: बेंदी माथे में मांग के बीचो बीच पहनी जाती है। जो सौम्यता, सरलता और पवित्रता का प्रतीक होती है।

10. झुमके: कानों में कुंडल पहनने से राहु और केतु दोष दूर होता है।

11. बाजूबंद: सोने-चांदी के कड़े बाजू में पहने जाते है। इससे परिवार के धन और समृद्धि की रक्षा होती है।

12. कमरबंद: यह कमर में पहना जाता है। यह सुहागिन अपने घर की मालकिन का प्रतीक होती है।

13.बिछिया: बिछिया पैर की उंगलियों में पहनी जाती है। यह महिलाओं के साहस का प्रतीक होता है।

 14. पायल: पायल पैरों की शोभा बढ़ाने का काम करती है। पायल केवल चांदी की पहनी जाती है।

15.अंगूठी: अंगूठी विवाहित पुरुष और महिलाओं का या स्त्री का प्रतीक चिन्ह है।

16. स्नान: बता दें कि श्रृंगारों का प्रथम चरण होता है स्नान। कोई भी श्रृंगार करने से पहले स्नान आवशयक होता है।

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