
Indira Ekadashi 2023: इंदिरा एकादशी व्रत जिसको रखने से सभी कष्ट और पापों से निजात मिल जाती है। ये एकादशी पितृ पक्ष के समय आती है इसलिए इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। साथ ही इस एकादशी पर दुलर्भ योग भी बन रहा है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की पूजा की जाती है। क्या है भगवान विष्णु का शालिग्राम स्वरूप। क्या इस एकादशी पर दुलर्भ योग बन रहा है।
आश्विन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार इंदिरा एकादशी का व्रत 10अक्टूबर को रखा जा रहा है। हिन्दू धर्म में इस बात का उल्लेख है की इस दिन व्रत रखने से पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की पूजा की जाती है।
विष्णु का विग्रह स्वरूपहै शालिग्राम
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शालिग्राम जी जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु का विग्रह स्वरूप हैं। ये काले रंग के गोल चिकने पत्थर के स्वरूप में होते हैं। ये नेपाल के गंडक नदी के तल में पाए जाते हैं। यहां पर सालग्राम नाम की जगह पर भगवान विष्णु का मंदिर है, जहां उनके इस रूप का पूजन होता है।कहा जाता है कि इस ग्राम के नाम पर ही उनका नाम शालिग्राम पड़ा। देवी भागवत पुराण के अध्याय 24, शिव पुराण के अध्याय 41के अलावा ब्रह्मवैवर्त पुराण में शालिग्राम शिला की उत्पत्ति के बारे में विस्तार से बताया गया है।
कैसे हुई थी उत्पत्ति
दरअसल, जालंधर नाम के एक असुर की पत्नी वृंदा अत्यंत सती थी। उसके सतीत्व को भंग किए बिना जालंधर को परास्त करना असंभव था। भगवान विष्णु ने छल से रूप बदलकर वृंदा का सतीत्व भंग कर दिया था। तब जाकर भगवान शिव ने जालंधर का वध किया। इस बात को जब वृंदा को पता चला कि उनका सतीत्व भगवान विष्णु ने भंग किया है तो वृंदा ने भगवान विष्णु को शिला के रूप में होने का श्राप दे दिया, जिसके बाद भगवान विष्णु शिला के रूप में परिवर्तित हो गए।
पुराणों में 33प्रकार के शालिग्राम भगवान का उल्लेख है, जिनमें से 24प्रकार के शालिग्राम को भगवान विष्णु के 24अवतारों का प्रतीक मानते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि शालिग्राम का आकार गोल है तो उसे भगवान का गोपाल रूप माना जाता है। वहीं मछली के आकार के लंबे शालिग्राम मत्स्य अवतार का प्रतीक हैं। इसके अलावा कछुए के आकार के शालिग्राम को विष्णु के कच्छप या कूर्म अवतार का प्रतीक माना जाता है।
बन रहे हैं दुर्लभ संयोग
इस दिन साध्य योग का निर्माण हो रहा है। यह एक शुभ योग होता है जिसका निर्माण किसी विशेष तिथि पर होता है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है।इंदिरा एकादशी के दिन साध्य योग के साथ ही शुभ योग का निर्माण हो रहा है। शुभ योग एक अद्वितीय योग होता है, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा और उनके नाम का जाप करने से साधक को अक्षय फल (अनन्त सुख और शांति) की प्राप्ति होती है। इस योग के द्वारा व्यक्ति आध्यात्मिक और भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा को व्यक्त कर सकता है। अक्षय फल की कामना कर सकता है।
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