क्या है नजूल संपत्ति विधेयक? जिसे लेकर यूपी में छिड़ा है सियासी संग्राम,जानें बिल का क्यों हो रहा है विरोध

क्या है नजूल संपत्ति विधेयक? जिसे लेकर यूपी में छिड़ा है सियासी संग्राम,जानें बिल का क्यों हो रहा है विरोध

Nazul Property Bill: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने मानसून सत्र के दौरान नजूल भूमि विधेयक (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंध व उपयोग) पेश किया था। जिसे विधानसभा में पास कर दिया गया लेकिन गुरुवार को यूपी विधान परिषद में जबरदस्त हंगामे के बीच ये बिल अटक गया। जिसके बाद इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया। आश्चर्य की बात ये है कि इस बिल पर CM योगी को न सिर्फ विपक्षी दलों बल्कि कई BJP नेताओं और सहयोगी दलों का भी विरोध झेलना पड़ा।

बता दें कि, अब ये बिल अटक गया है और सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया है। अब जब सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट आएगी तब इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस खबर में जानिए क्या है नजूल संपत्ति बिल।

क्या होती है नजूल की जमीन?

देश में ब्रिटिश शासन के दौरान जो राजा या आंदोलनकारी उनका विरोध करते थे उनकी जमीन छीन ली जाती थी। इस जमीन पर ब्रिटिश सरकार का कब्जा था। ऐसी भूमियों को नजूल संपत्ति कहा जाता है। भारत की आज़ादी के बाद इस ज़मीन और ऐसी संपत्तियों का अधिकार राज्य सरकार के पास चला गया। जिसे सरकार ने लीज पर देना शुरू कर दिया।

राज्य सरकार द्वारा नजूल भूमि को पट्टे पर देने की अवधि 15 वर्ष से 99 वर्ष तक हो सकती है। इस तरह की जमीन हर राज्य में है। इसी जमीन को लेकर यूपी सरकार ये बिल लेकर आई है। इन संपत्तियों का उपयोग सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जिनमें अस्पताल, स्कूल और पंचायतें शामिल हैं।

आखिर क्यों मचा है विधेयक को लेकर बवाल?

दरअसल, नजूल बिल के जरिए यूपी की सभी नजूल जमीनें सरकार के कब्जे में आ सकती हैं। हालाँकि सरकार स्कूलों, अस्पतालों और गरीबों के आवासों को इससे बाहर रखने की बात कर रही थी, लेकिन इसके प्रावधानों को लेकर कई संदेह थे। नजूल बिल के मुताबिक सरकार नजूल जमीन को सार्वजनिक उपयोग में लाना चाहती है। इस कार्य के लिए पहले से काबिज कब्जेदारों को बेदखल करना होगा। नजूल भूमि पट्टे पर है। ये पट्टे लंबी अवधि के होते हैं यानी पट्टे की अवधि 15 से 99 साल तक होती है।

लीज समाप्त होने के बाद इसे अगली अवधि के लिए नवीनीकृत किया जाता है। कुछ अपवादों को छोड़कर सरकार इस बिल के जरिए लीज रिन्यू करने के पक्ष में नहीं है। यानी ऐसी जमीनें फिर से सरकार के स्वामित्व में आ जाएंगी। सरकार पट्टेदारों को बेदखल कर सकती है और जमीन वापस ले सकती है और अपनी पसंद के अनुसार उनका उपयोग कर सकती है। यूपी में करोड़ों लोग नजूल भूमि पर रहते हैं। ऐसे में यह एक बड़े विवाद का विषय बन गया। उस आबादी के सिर से छत छिन जाने का ख़तरा पैदा हो गया। यही वजह है कि यूपी विधानसभा में बहस के दौरान बीजेपी के अपने ही विधायकों ने इसका विरोध किया।

 

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