
Mohan Bhagwat’s Statement On Vijayadashami: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी भाषण ने देश में सियासी हलचल पैदा कर दी है। उनके विचारों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बाद अब राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी कड़ी आलोचना की है। सिब्बल ने भागवत के बयान को लेकर तंज कसते हुए कहा, "विजयादशमी पर मोहन भागवत का संदेश यह है कि सभी त्योहार एक साथ मनाए जाने चाहिए और सभी प्रकार के लोगों के बीच मित्रता होनी चाहिए। भाषाएं और संस्कृतियां विविध हो सकती हैं, लेकिन दोस्ती हमें एक साथ लाएगी।" उन्होंने यह भी पूछा, "कौन सुन रहा है? मोदी? अन्य?"
RSSप्रमुख ने अपने भाषण में कहा कि स्वस्थ और सक्षम समाज के लिए सामाजिक सद्भाव आवश्यक है। उनका कहना था कि यह कार्य केवल प्रतीकात्मक कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर सौहार्द विकसित करने से संभव है।
कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भागवत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि RSS"उस पार्टी का समर्थन करता है जो देश में फूट डालना चाहती है।"
भागवत के भाषण की मुख्य बातें
विजयादशमी के अवसर पर अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि भारत का राष्ट्रीय जीवन सांस्कृतिक एकता पर आधारित है और इसका सामाजिक जीवन महान मूल्यों से प्रेरित है। उन्होंने सांस्कृतिक परंपराओं को प्रभावित करने वाले खतरों का उल्लेख करते हुए कहा कि मूल्यों और परंपराओं का विनाश कुछ समूहों की कार्यप्रणाली का हिस्सा है।
भागवत ने यह भी कहा कि ऐसे समूहों का पहला कदम समाज की संस्थाओं पर कब्जा करना होता है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा प्रणाली, मीडिया और बौद्धिक प्रवचन जैसे संस्थान समाज के विचारों और विश्वासों को प्रभावित करते हैं।
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