
Gauri Lankesh Murder: बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश के आरोपियों के महिमामंडन ने भारतीय समाज में एक बार फिर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लंकेश हत्याकांड के कुछ आरोपियों की हालिया रिहाई ने शहर में विवाद का एक नया दौर शुरू कर दिया है। इसमें विशेष रूप से पारसुराम वाघमोर और मनोहर यादव का नाम उभरा है, जिनका शनिवार को हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
इस स्वागत समारोह ने न केवल स्थानीय मीडिया का ध्यान खींचा, बल्कि यह सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। हिंदुत्ववादी संगठनों ने आरोपियों को शॉल और माला पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके अलावा, धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया गया, जिसमें कालीकादेवी मंदिर में पूजा और शिवाजी महाराज की मूर्ति पर पुष्पमाला अर्पित करना शामिल था।
जमानत पर रिहाई की जानकारी
बेंगलुरु की सेशंस कोर्ट ने हाल ही में गौरी लंकेश हत्याकांड में शामिल आठ आरोपियों को जमानत दी है। सितंबर 2023 में, कर्नाटक हाईकोर्ट ने चार अन्य आरोपियों को भी जमानत दी थी। इसके बाद, 9 अक्टूबर को सेशंस कोर्ट ने उन्हें बेल पर राहत दी, जिसके तुरंत बाद 11 अक्टूबर को ये आरोपी जेल से रिहा कर दिए गए।
गौरी लंकेश भारतीय पत्रकारिता की एक प्रमुख आवाज थीं। उनकी हत्या ने देशभर में उबाल मचाया था, क्योंकि वे कट्टर हिंदुत्व विचारधारा की कड़ी आलोचक थीं। उनकी हत्या 5 सितंबर 2017 को उनके घर के बाहर की गई थी, और यह मामला लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।
गौरी लंकेश हत्याकांड की प्रमुख बातें:
•पत्रकार गौरी लंकेश की 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में उनके घर के बाहर तीन बंदूकधारियों ने हत्या कर दी थी।
•दिसंबर 2023 में, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गौरी लंकेश हत्या मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत स्थापित करने का निर्देश दिया था।
•गौरी लंकेश कर्नाटक की वामपंथी विचारधारा वाली वरिष्ठ पत्रकार थीं, जो कट्टर हिंदुत्व प्रथाओं की कठोर आलोचक थीं।
•हत्या के आरोपियों को 9 अक्टूबर को बेंगलुरु सेशन कोर्ट द्वारा जमानत दी गई थी।
•आरोपियों को 11 अक्टूबर को प्रप्पाबा अग्रहारा जेल से रिहा किया गया था।
यह घटनाक्रम न केवल लंकेश की हत्या के मामले को फिर से ताज़ा करता है, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और महिलाओं की सुरक्षा पर भी गंभीर चिंताएँ उत्पन्न करता है।
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