
नई दिल्ली: टाइम किसी के लिए नहीं रुक सकता, हम छोटे से बडें होते जाते है, और जिम्मेदारियां बढ़ती जाती है। जिम्मेदारियों के बीच हम छोटी-छोटी टेंशन से जूझते रहते है। हम हल ढुढने की बजाय अंदर ही अंदर घुटते रहते है, और इसी वजह से हमें बहुत सी बीमारियों हो जाती है, मानसिक तनाव, शरीर परेशानी जैसे रोग हो जाते है। डिप्रेशन भी मानसिक रोग का एक कारण है।
क्या है डिप्रेशन
डिप्रेशन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आपको काफी अकेलापन महसूस होता है। आपका खुद पर काबू नहीं रख पाते। जल्दी-जल्दी मूड स्विंग होते है, यानी मन का अचानक या अत्यधिक परिवर्तन होना मूड स्विंग है। इसके कुछ और उद्धारण भी है जैसे:
• अस्वस्थ मनोदशा
• नशा
• तनावपूर्ण घटनाएं
• आर्थिक समस्या
• आत्मसम्मान की कमी
• उदास मन
• बेचैनी या एंग्जाइटी(Anxiety)
• चिड़चिड़ापन
• ऊर्जा के स्तर में गिरावट या सुस्ती
• निराशा महसूस होना
• सोचने और निर्णय लेने में कठिनाई
• ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
• कुशलता से काम करने में असमर्थता
• अपराध बोध और बेकार की बातों के बारे में सोचना
• दूसरों से अलग होना
• नींद में गड़बड़ी व नींद के चक्र में बदलाव।
क्या कहता है इसके पीछे का साइंस
हमारे दिमाग में एक व्हाइट मैटर होता है, जिसमें फाइबर होते हैं। ये दिमाग के सेल्स को एक-दूसरे से कनेक्ट होने से रोकता है। व्हाइट मैटर के द्वारा ही हम भावनाओं को महसूस कर पाते हैं और कुछ सोचने की क्षमता रख पाते हैं, हालांकि डिप्रेशन लोगों के लिए आज के समय में एक साधारण-सी बीमारी हो चुकी है जिसमें अगर व्यक्ति को नींद ना आए, घबराहट हो या स्ट्रेस हो तो समझ लीजिए कि आप डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं।
कैसे खुद को निकाल सकते है इससे बाहर
अगर आप अकेले रहते है, आपके पास बात करने के लिए कोई भी नही है। अगर आप खुद को अकेला महसूस कर रहे है, तो आप को डिप्रेश के लक्षण हो सकते है। गबराई मत इससे आप खुद से बहार आ सकते है।
• मेडिटेशन करें
• प्रकृति से करें प्यार
• एक्सरसाइज करें
• ध्यान व योग को दिनचर्या में शामिल करें।
आठ घंटे की नींद लें। नींद पूरी होगी तो दिमाग तरोताजा होगा और नकारात्मक भाव मन में कम आएंगे।
• प्रतिदिन सूरज की रोशनी में कुछ देर जरूर रहें।
• बाहर टहलने जाएं। रोज बाहर टहलें, कभी-कभी कॉफी शॉप में कुछ समय बिताएं या बाहर खाना खाने जाएं। इससे मन में उत्साह बना रहेगा।
• अपने काम का पूरा हिसाब रखें। दिन भर में आप कितना काम करते हैं और किस गतिविधि को कितना समय देते हैं इस पर जरूर गौर करें। इससे आपको सभी गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने में आसानी होगी और तनाव कम होगा।
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