पाकिस्तान से हुई मॉडर्न एरा होली की शुरुआत, जानें क्या हैं 'इस्लाम की धरती' से होली का खास कनेक्शन

पाकिस्तान से हुई मॉडर्न एरा होली की शुरुआत, जानें क्या हैं 'इस्लाम की धरती' से होली का खास कनेक्शन

Holi 2025: भारत में हर त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। चाहे दिवाली हो, होली हो या रक्षाबंधन हर त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। अगर होली की बात करे तो ये त्योहार रंगों, खुशी और मस्ती भरा होता है। सभी एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और होली की बधाई देते है। होली की असली पहचान रंगों से ही होती है। ये त्योहार सिर्फ रंगों का ही नहीं, बल्कि आपसी प्रेम का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते है होली का असली कनेक्शन पाकिस्तान से है।

पाकिस्तान में एक ऐसी जगह है, जिसका होली के त्योहार से गहरा नाता है। ऐसा कहा जाता है उस समय पाकिस्तान में होली नौ दिन के लिए मनाई जाती थी।

पाकिस्तान और होली का कनेक्शन

होली के पीछे की कहानी में पाकिस्तान का एक महत्वपूर्ण कनेक्शन है। यह कहानी हिरण्यकश्यप और उसके पुत्र प्रह्लाद से जुड़ी है, जो कि प्राचीन भारत में हुई थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिरण्यकश्यप का संबंध पाकिस्तान के मुल्तान से है।मुल्तान में हिरण्यकश्यप का एक प्राचीन मंदिर हुआ करता था, जो अब नहीं है। लेकिन यह शहर हिरण्यकश्यप के नाम से जुड़ा हुआ है। जो कि होली के पीछे की कहानी में एक महत्वपूर्ण पात्र है।

9दिन चलता था होली का उत्सव

पौराणिक मान्यता है कि जहां आज प्रह्लादपुरी मंदिर है। वहीं पर हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को खंभे से भी बांधा था। यही पर भगवान नरसिंह ने खंभे से प्रकट होकर हिरण्यणकश्य्प को मौत के घाट उतारा था।

वहीं, साल 1947 में बंटवारे के समय प्रह्लादपुरी मंदिर पाकिस्तान के हिस्से में चला गया। लेकिन इसके बाद भी होली पर यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटती थी। यहां दो दिनों तक होलिका दहन किया जाता था। इसके बाद 9 दिन तक होली मेला और रंगोत्सपव मनाया जाता था।

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