Makar Sankranti पर आखिर क्यों खाया जाता है दही-चूड़ा? जानें इसके पीछे की धार्मिक वजह

Makar Sankranti पर आखिर क्यों खाया जाता है दही-चूड़ा? जानें इसके पीछे की धार्मिक वजह

Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, जो पूरे देशभर में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति को नए साल का आगमन भी माना जाता है।  इसलिए, इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं।  मकर संक्रांति के दिन से ही विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त देखे जाने लगते हैं, क्योंकि उस दिन से खरमास खत्म हो जाता है।

आपको बता दें कि,यह एक ऐसा त्यौहार है जिसे हमारे देश में कई नामों से पुकारा जाता है। इसे तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, पंजाब में लोहड़ी, असम में भोगाली, बंगाल में गंगासागर और उत्तर प्रदेश में खिचड़ी के नाम से जाना जाता है।

मीठा या दही-चूड़ा खाना इस त्यौहार का हिस्सा

इस दिन देश के कई राज्यों में दही और चूड़ा खाने का रिवाज है। दरअसल, मीठा या दही-चूड़ा इस त्यौहार का अनिवार्य हिस्सा होता है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में मकर संक्रांति के दिन सुबह दही-चूड़ा में गुड़ मिलाकर खाया जाता है। यह स्वादिष्ट और हल्का-फुल्का भोजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसके सेवन से आपकी सेहत को भी काफी फायदा होता है। दरअसल,  मकर संक्राति पर चूड़ा-दही और गुड़ खाने के पीछे धार्मिक और सेहत से जुड़ी कई वजहें शामिल हैं। चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आखिर इस दिन दही-चूड़ा और गुड़ क्यों खाते हैं और इन्हें खाने से आपकी सेहत को क्या फ़ायदे होंगे।

दही चूड़ा सेहत के लिए फायदेमंद

दही चूड़ा खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। दही में प्रोटीन, कैल्शियम और अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। गुड़ में आयरन भी प्रचुर मात्रा में होता है जो अपच में मदद करता है। जब आप सुबह दही चूड़ा खाते हैं तो आपको दिन भर काम करने की ऊर्जा मिलती है। इससे आपको जल्दी थकान महसूस नहीं होगी।

इसके पीछे की धार्मिक वजह

दही-चूड़ा का सफेद रंग शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। यह नए साल की शुरुआत का शुभ संकेत है और आने वाले समय में शुभता, समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद माना जाता है।

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