
Supreme Court Hear On PIL: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार यानी 2 दिसंबर को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया है। दरअसल, याचिका में कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों के लापता होने को लेकर चिंता जताई गई थी और इस मामले में केंद्र सरकार को आदेश देने की अपील की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई को टाल दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तीखी टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ताओं से कहा कि आप जानते हैं वे घुसपैठिए हैं। भारत का उत्तरी बॉर्डर सुरक्षा की दृष्टीकोण से संवेदनशील है। अगर कोई गैरकानूनी ढंग से आया है, तब भी आप उसके लिए रेड कार्पेट पर चाहते हैं। वे सुरंगों के जरिए घुसते हैं और फिर आपके खाने, निवास , बच्चों की शिक्षा, आदि के अधिकारी हो जाते हैं।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि रोहिंग्या म्यांमार के रहने वाले मुस्लिम है। जो वहां से अवैध तरीके से भारत में घुसकर बैठे हैं। अब ये चाहते हैं कि सरकार इन्हें आधिकारिक तौर पर शरणार्थी मान ले। जबकि सरकार ने कभी आधिकारिक तौर पर उन्हें शरणार्थी घोषित नहीं किया है। ये केस साल 2025 में दिल्ली में हिरासत की घटना का है। इससे पहले भी कोर्ट ने रोहिंग्या पर बात की है। मई 2025 में एक केस में कोर्ट ने कहा था कि रोहिंग्या को समुद्र में फेंकने की कहानियां फिक्शनल टेल जैसी लगती है।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गई
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सबसे पहले ये पूछा कि कौन सा सरकारी आदेश रोहिंग्या को रिफ्यूजी बनाता है। रिफ्यूजी एक लीगस टर्म है। अगर कोई अवैध तरीके से घुस जाए, तो क्या उसे रखना जरूरी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ये याचिका प्रभावित व्यक्ति ने नहीं दाखिल की, तो इसका लॉकस स्टैडी क्या है? वहीं, याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि रिफ्यूजी स्टेटस की मांग नहीं कर रहे हैं। वह सिर्फ इतना चाहते हैं कि डिपोर्टेशन सरकारी नियमों के मुताबिक हो।
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