
Jyoti Malhotra Case Update: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) का जासूसी नेटवर्क एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल के घटनाक्रमों ने भारत में ISI की गहरी साजिशों को उजागर किया है। फर्जी पासपोर्ट और वीजा अधिकारियों की आड़ में संचालित होने वाले एजेंट शामिल हैं। इन अधिकारियों में से एहसान उर रहमान उर्फ दानिश का नाम सामने आया है, जो वीजा डेस्क पर तैनात था।
ज्योति मल्होत्रा की डायरी और मोबाइल डेटा से पता चला कि उसने कथित तौर पर ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील सैन्य अभियानों की जानकारी ISI को दी थी। इसी के साथ वह पाकिस्तान के तीन ISI अधिकारियों के संपर्क में भी थी। पूछताछ में ज्योति किसी पछतावे के साफ शब्दों में कहा 'मुझे कोई अफसोस नहीं है।'
ज्योति मल्होत्रा और ISI का कनेक्शन
दरअसल, हाल ही में हरियाणा के हिसार से गिरफ्तार हुई यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के जरिए इस जासूसी नेटवर्क के सारे राज धीरे-धीरे सामने आ रहे है। ज्योति मल्होत्रा पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप लगा है। ज्योति जो अपने यूट्यूब चैनल 'ट्रैवल विद जो' के लिए जानी जाती थीं, पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप लगा। जांच में पता चला कि ज्योति ने पाकिस्तान हाई कमीशन के एक अधिकारी एहसान-उर-रहमान उर्फ दानिश, के जरिए ISI के साथ संपर्क स्थापित किए थे। वहीं, दानिश जो कथित तौर पर वीजा अधिकारी के रूप में दिल्ली में तैनात था, वास्तव में ISI का एजेंट था।
फर्जी पहचान थी ISI की रणनीति
फर्जी पासपोर्ट और वीजा रैकेट के जरिए ISI ने भारत में अवैध प्रवासियों को बसाने और जासूसी नेटवर्क को बढ़ाने की कोशिश की। कोलकाता में एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ, जिसमें 130लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। इस रैकेट में डाक विभाग के कुछ कर्मचारी भी शामिल थे। जो बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट दिलाने में मदद करते थे।
दानिश का फर्जी पासपोर्ट का खेल
बता दें, ISI की यह साजिश सिर्फ ज्योति तक सीमित नहीं थी। जांच में सामने आया कि दानिश ने न केवल ज्योति को वीजा दिलवाया, बल्कि उत्तर प्रदेश के रामपुर के एक अन्य संदिग्ध शहजाद वहाब को भी वीजा दिलाया था। मामले का खुलासा होने के बाद शहजाद को मोरादाबाद से गिरफ्तार किया गया। जिसके बाद उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया। उसके मोबाइल से ISI हैंडलर के साथ लगातार संपर्क की जानकारी मिली है। सूत्रों की मानें तो ISI ने शहजाद को भारतीय सिम कार्ड और धन की व्यवस्था करने के साथ नए एजेंटों की भर्ती का काम भी सौंपा था।
इसके अलावा कोलकाता में एक अन्य मामले में अहमद हुसैन आजाद नामक व्यक्ति का नाम सामने आया। जो पहले बांग्लादेशी नागरिक माना गया, लेकिन जांच करने पर वह पाकिस्तानी नागरिक निकला। वह फर्जी बांग्लादेशी पासपोर्ट के साथ भारत में रह रहा था। साथ ही, 200 से 500 लोगों के लिए फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कर तुका था। इसके अलावा अहमद के मोबाइल से 20,000 से ज्यादा संपर्क नंबर और पाकिस्तानी नागरिकों के साथ चैट रिकॉर्ड मिले। जो ISI के साथ उसके संबंधों की पुष्टि करते हैं।
Leave a comment