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नन्हीं गरविका की जिंदगी की जंग, 16 करोड़ के इलाज के लिए परिवार ने लगाई गुहार

नन्हीं गरविका की जिंदगी की जंग, 16 करोड़ के इलाज के लिए परिवार ने लगाई गुहार

जब बच्चे मां की गोद में खेलते हैं और मुस्कुराना सीखते हैं, उस उम्र में नन्ही गरविका जिंदगी के लिए जंग लड़ रही है। गरविका को एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी Spinal Muscular Atrophy Type 1 (एसएमए टाइप 1) है, जो धीरे-धीरे शरीर की मांसपेशियों को कमजोर कर देती है और जानलेवा साबित हो सकती है। गरविका की मां रोहिणी बताती हैं कि उन्होंने भी हर माता-पिता की तरह अपनी बेटी के लिए एक खुशहाल और स्वस्थ जीवन का सपना देखा था। जब डॉक्टरों ने इस बीमारी की जानकारी दी, तो परिवार के सारे सपने टूट गए। यह बीमारी इतनी गंभीर है कि बिना इलाज के बच्चे का जीवन खतरे में पड़ सकता है। इस बीमारी के इलाज के लिए एक खास दवा Zolgensma उपलब्ध है, जिसे एक बार देने से ही बीमारी की प्रगति को रोका जा सकता है। यह जीन थेरेपी शरीर में खराब जीन को ठीक कर मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है।

आप कैसे कर सकते हैं गरविका की मदद?

हालांकि, इस इलाज की कीमत करीब 16 करोड़ रुपये है, जो किसी भी आम परिवार के लिए जुटाना बेहद मुश्किल है। कई महीनों की कोशिश के बाद दवा बनाने वाली कंपनी नोवार्टिस ने ईएमआई के जरिए यह इलाज देने की सहमति दी है, लेकिन इलाज शुरू करने के लिए पहले 9 करोड़ रुपये की व्यवस्था करना जरूरी है। परिवार अब लोगों से मदद की अपील कर रहा है।

रोहिणी कहती हैं कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चे की जिंदगी की कीमत नहीं लगाना चाहता, लेकिन हालात ऐसे हैं कि उन्हें मजबूरी में लोगों से मदद मांगनी पड़ रही है। अगर आप नन्हीं गरविका की जान बचाना चाहते हैं तो Paytm/Google Pay/PhonePe के माध्यम से दान कर सकते हैं। इसके लिए आप supportgarvik4639@cashfreensdlpb पेमेंट करें। बता दें कि इस फंडरेजर और यूपीआई आईडी के माध्यम से प्राप्त दान राशि को मरीज के इलाज के लिए इम्पैक्ट गुरु के बैंक खाते में सुरक्षित रूप से जमा किया जाएगा। यह यूपीआई आईडी किसी व्यक्ति या परिवार के निजी बैंक खाते से संबद्ध नहीं है। 

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते इलाज शुरू हो जाए तो गरविका एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकती है। ऐसे में हर दिन बेहद कीमती है। परिवार ने समाज के लोगों, संस्थाओं और दानदाताओं से मदद की गुहार लगाई है, ताकि इस मासूम को जीने का एक मौका मिल सके। गरविका की यह कहानी न सिर्फ एक परिवार का दर्द है, बल्कि समाज के लिए भी एक अपील है कि मिलकर एक जिंदगी बचाई जा सकती है। 

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