
PM Modi On India-China Relation: रविवार को लेक्स फ्रिडमैन और प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत प्रसारित हुई। पीएम का ये सबसे लंबा इंटरव्यू रहा। इस पॉडकास्ट में पीएम ने अपनी निजी जीवन, राजनैतिक यात्रा और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से अपना पक्ष रखा। इस दौरान लेक्स ने पीएम मोदी से चीन को लेकर भी सवाल पूछे। साल 2020 में शुरु हुई सीमा विवाद का अंत लंबी बातचीत और लगातार प्रयास के बाद साल 2025 में जाकर हुआ। रूस में पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कई सालों पर द्विपक्षिय वार्ता भी हुई। चीन को लेकर लेक्स ने पीएम मोदी से पूछा कि ‘आप और शी जिनपिंग एक-दूसरे को दोस्त मानते रहे हैं। हालिया तनाव को कम करने और चीन के साथ संवाद और सहयोग फिर से शुरू करने के लिए उस दोस्ती को कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है?’
पीएम ने क्या दिया जवाब?
लेक्स के सवाल पर जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मेरी हाल ही में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद, हमने सीमा पर सामान्य हालात की वापसी को देखा है. हम अब 2020 से पहले की स्थिति को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके आगे पीएम मोदी ने कहा, “देखिए, भारत और चीन के बीच का रिश्ता कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों की प्राचीन संस्कृतियां और सभ्यताएं हैं। आधुनिक दुनिया में भी, वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर आप ऐतिहासिक रिकॉर्ड देखें, तो सदियों से भारत और चीन ने एक-दूसरे से सीखा है।“
पीएम मोदी ने आगे कहा, “उन्होंने हमेशा किसी न किसी तरह से वैश्विक भलाई में योगदान दिया है। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि एक समय पर भारत और चीन मिलकर दुनिया की जीडीपी का 50% से अधिक हिस्सा बनाते थे। यह दिखाता है कि भारत का योगदान कितना बड़ा था। और मुझे लगता है कि हमारे संबंध हमेशा से बहुत मजबूत रहे हैं, गहरे सांस्कृतिक संबंधों के साथ। अगर हम सदियों पीछे देखें, तो हमारे बीच कोई वास्तविक संघर्ष का इतिहास नहीं है। यह हमेशा एक-दूसरे से सीखने और समझने के बारे में रहा है। एक समय पर, बौद्ध धर्म का चीन पर गहरा प्रभाव था, और यह दर्शन मूल रूप से यहां से आया था।
चीन के साथ रिश्तों पर क्या बोले पीएम?
इस पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने भारत-चीन के रिश्तों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “हमारा रिश्ता भविष्य में भी उतना ही मजबूत रहना चाहिए। इसे बढ़ते रहना चाहिए। बेशक, मतभेद स्वाभाविक हैं। जब दो पड़ोसी देश होते हैं, तो कभी-कभी असहमति होना तय है। यहां तक कि एक परिवार में भी सब कुछ हमेशा सही नहीं होता। लेकिन हमारा ध्यान इस बात पर है कि ये मतभेद विवाद में न बदलें। हम इसी पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। असहमति के बजाय, हम संवाद पर जोर देते हैं क्योंकि केवल संवाद के माध्यम से ही हम एक स्थिर सहयोगी संबंध बना सकते हैं जो दोनों देशों के सर्वोत्तम हित में हो।”
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