
नई दिल्ली: भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गयाहै। आज सुबह भारतीय मुद्रा में एक डॉलर की कीमत 78.96 रुपये पर पहुंच गई है, जो आदमी के लिए अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाली है।रिजर्व बैंक ने रुपये की गिरावट को रोकने के लिए कदम तो उठाए, लेकिन वैश्विक बाजार में जारी उथल-पुथल और घरेलू बाजार से लगातार विदेशी निवेशकों की वापसी के कारण स्थिति पर काबू नहीं पाया जा सका।
डॉलर के मुकाबले रुपये में इस महीने ही 1.87 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि साल 2022 में अब तक भारतीय मुद्रा में 6.28 फीसदी की गिरावट आई है। विशेषज्ञ अब 79.50 तक पहुंचने का अनुमान लगा रहे हैं। रुपया मंगलवार को 48 पैसे टूटा था, जबकि आज यह 11 पैसे कमजोर हुआ है।
क्या है गिरावट की मुख्य वजह
रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की तेजी से वापसी है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने जून में भारतीय शेयर बाजार से ही करीब 50 हजार करोड़ रुपये निकाले हैं, जबकि 2022 में अब तक भारतीय बाजार से 2.25 लाख करोड़ रुपये निकाले जा चुके हैं। इसके अलावा पी-नोट के जरिए विदेशी निवेशकों के निवेश में भी कमी आई। यूएस फेड रिजर्व ने अपनी ब्याज दरें बढ़ाईं, जिसके बाद वैश्विक बाजार में डॉलर की मांग बढ़ी और यह 20 साल की मजबूत स्थिति में पहुंच गया।
इतना ही नहीं रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य भू-राजनीतिक कारणों से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और ऐसे में सभी निवेशक डॉलर की ओर भाग रहे हैं। इसका सीधा असर रुपये की कमजोरी पर पड़ा। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से रुपये पर भी दबाव है।
कहां और कौन होगा प्रभावित
सबसे पहले रुपए गिरने से आयात महंगा होगा, क्योंकि भारतीय आयातकों को अब डॉलर के मुकाबले ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ेंगे। भारत अपने कच्चे तेल की खपत का 85 प्रतिशत आयात करता है, जिससे डॉलर महंगा होगा और उस पर दबाव पड़ेगा। अगर ईंधन महंगा हुआ तो माल भाड़ा बढ़ जाएगा, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे और आम आदमी पर महंगाई का बोझ भी बढ़ेगा।इसका असर विदेश में पढ़ने वालों पर भी पड़ेगा और उनका खर्चा बढ़ेगा, क्योंकि अब उन्हें डॉलर के मुकाबले ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ेंगे। चालू खाते का घाटा बढ़ेगा, जो पहले ही 40 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह $55 बिलियन का अधिशेष था।
फायदा भी होगा
डॉलर के महंगे होने का फायदा निर्यातकों को मिलेगा। आईटी और फार्मा सेक्टर देश में काफी एक्सपोर्ट करते हैं, जिसका फायदा मिलेगा। जो लोग विदेश में काम करते हैं और अपना वेतन भारत भेजते हैं, उन्हें लाभ होगा। अगर ज्यादा से ज्यादा विदेशी भारत घूमने आएंगे तो पैसे की मांग बढ़ेगी और इससे अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।
स्थिति कैसे नियंत्रण में आएगी
रुपये को रोकने के लिए आरबीआई को एक बार फिर अपना खजाना खोलना होगा। 2022 की शुरुआत से लेकर अब तक आरबीआई को रिजर्व फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का कई बार इस्तेमाल करना पड़ा। पिछले पांच महीनों में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 40 अरब डॉलर घटकर 590 अरब डॉलर पर आ गया है. अप्रैल से अब तक रिजर्व बैंक को 15 अरब डॉलर जारी करने पड़े हैं। रुपये को संभालना है तो एक बार फिर आरबीआई को अपने रिजर्व का इस्तेमाल करना होगा।
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