
Supreme Court Order: दिल्ली में कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने को लेकर ये मामला चर्चा में बना हुआ है। इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर आज 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की विशेष पीठ ने सुनवाई की। दिल्ली सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुत्तों के हमले से बच्चे मर रहे हैं। नसबंदी से कुत्तों के काटने की घटनाएं थम नहीं रही हैं। देश में इस तरह के कई चौंकाने वाले मामले हैं। हमारा इतना कहना है कि कोई भी जानवरों से नफरत नहीं करता है, लेकिन लोगों की सुरक्षा जरूरी है। कोर्ट के सामने दलील रखते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोई भी कुत्तों को मारने के लिए नहीं कह रहा है। हम बस उन्हें इंसानी आबादी से अलग रखना चाहते हैं।
कोर्ट ने सुनी दलीलें
जनरल ने आगे कहा कि किसी भी देश में दो पक्ष होते हैं। एक मेजोरिटी है, जो मुखर होकर बात करती है, लेकिन दूसरा पक्ष चुपचाप सहता जाता है। यहां वोकल माइनॉरिटी है, जो चिकन खाती है और अब पशु प्रेमी बन गई है। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि कोर्ट के निर्देश में कहा गया है कि कुत्तों को नसबंदी के बाद छोड़ा नहीं जाएगा, तो फिर वे कहां जाएंगे? ये नियमों के खिलाफ है; इस पर रोक लगनी चाहिए। जब एक बड़ी संख्या में कुत्तों को एक साथ शेल्टर में रखा जाएगा तो वे एक दूसरे पर हमला करेंगे; इससे इंसान भी प्रभावित होंगे।
याचिका ने कोर्ट से कही ये बात
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि कुत्तों को सड़कों से उठाने के फैसले पर फिलहाल रोक लगनी चाहिए और हमें जवाब देने के लिए समय देना चाहिए। इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही सड़कों से कुत्ते उठाने शुरू कर दिए गए। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा कैसे किया जा रहा है, जिस पर सिब्बल ने कहा कि प्रशासन ने कुत्ते उठाना शुरू कर दिया है।
कोर्ट ने लिया ये फैसला
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह आज 14 अगस्त को इस मामले को बंद नहीं करेंगे। सिर्फ देखेंगे कि फैसले के किस-किस हिस्से पर आपत्ति है और या उन पर रोक लगानी चाहिए या नहीं। अदालत ने आगे कहा कि समाधान निकालना जरूरी है। समाधान निकाला जाए ना कि विवाद बढ़ाया जाए। यह कहते हुए कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखा है।
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