Devprayag: यहां होता है दो नदियों का अनोखा संगम, सास बहू का है रिश्ता

Devprayag: यहां होता है दो नदियों का अनोखा संगम, सास बहू का है रिश्ता

Devprayag : उत्तराखंड जिसे देवों की नगरी कहा जाता है। जहां के कण कण में भगवान बसते हैं। ऐसी ही नगरी में दो नदियों का अनोखा संगम देखने को मिलता है। इनका रंग एक दूसरे से बिलकुल अलग होता है लेकिन इनका रिश्ता सास बहू का रिश्ता कहा जाता है। कौन सी है वो नदी और दोनों नदियों को ये उपाधि क्यों दी गई इसी के बारे में आज हम आपको बताएंगे

 चारों ओर पहाड़ों की बीच बसा उत्तराखंड। जहां के एक एक पत्थर में भगवान का वास है। ऐसे राज्य में एक जगह देवप्रयाग है जो प्रसिद्ध तीर्थस्थानों में से एक है। यहां दो नदियां बहती हैं। एक कलकलाती हुई शोर मचाती हुई नदी तो दूसरी रात के समान शांत नदी। एक का नाम अलकनंदा नदी है तो वही दूसरे का नाम भागीरथी नदी है। अलकनंदा बहुत कम आवाज करती है। वहीं भागीरथी बहुत ज्यादा शोर करते हुए बहती है।

सास और बहू का है रिश्ता

अलकनंदा के पानी का रंग नीलाहोता है तो वहीं भागीरथी का रंग हल्के हरे रंग का होता है। इन दोनों के बारे में कहा जाता है कि अलकनंदा बहू है और भागीरथी सास। पहाड़ के एक तरफ से अलकनंदा और दूसरी तरफ से भागीरथी आकर जिस जगह पर मिलते हैं वह दृश्य बेहद ही खूबसूरत होता है। इसी संगम के बाद इस नदी को गंगा के नाम से भी जाना जाता है। यहीं से दोनों नदियों की सम्मलित धार "गंगा"कहलाती है।

भगवान राम का भीहै खास संबंध

दरअसल, त्रेता युग में रावण और उसके परिवार का वध करने के बाद भगवान राम को ब्रह्मण हत्या का दोष लगा था उस दोष के निवारण के लिए भगवान राम सीता जी और लक्ष्मण जी सहित देवप्रयाग में अलकनन्दा और भागीरथी नदी के संगम पर तपस्या करने आये थे। देवप्रयाग में भगवान राम का सीता जी और लक्ष्मण जी के साथ आने का वर्णन केदारखण्ड में मिलता है। देवप्रयाग के बारे में ये कहा जाता है कि जब राजा भागीरथ ने माँ गंगा को पृथ्वी पर आने के लिए मना लिया था तो 33 करोड़ देवी-देवता भी उनके साथ स्वर्ग से उतरे थे। तब उन्होंने अपना आवास गंगा जी की जन्म भूमि, देवप्रयाग में बनाया था।

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