
Stalin On Delimitation Dispute: भारत में परिसीमन (Delimitation) को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस मुद्दे पर विरोध जताया है। उन्होंने छह राज्यों के प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। इस बैठक में कई मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम और अन्य नेता शामिल हो सकते हैं।
क्या है परिसीमन, और इस पर विवाद क्यों?
भारत में हर दस साल में जनगणना होती है। इसके आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय की जाती हैं। इसी प्रक्रिया को परिसीमन कहा जाता है। इसके तहत लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या राज्यों की जनसंख्या के हिसाब से तय होती है।
इसी बदलाव को लेकर एम.के. स्टालिन ने आपत्ति जताई है। अगर लोकसभा सीटों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है, तो उत्तर भारतीय राज्यों की सीटें बढ़ जाएंगी, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें कम हो सकती हैं। 2011की जनगणना के अनुसार, उत्तर भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, जबकि दक्षिण भारत में जनसंख्या नियंत्रण सफल रहा है। ऐसे में दक्षिण भारतीय राज्यों को संसद में कम प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
स्टालिन का सख्त रुख, कई राज्यों को किया आमंत्रित
परिसीमन से होने वाले नुकसान को देखते हुए एम.के. स्टालिन ने केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार, बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया है।
स्टालिन इससे पहले भी हिंदी भाषा को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठा चुके हैं। अब परिसीमन को लेकर उन्होंने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।
क्या दक्षिण भारत अपनी बात मनवा पाएगा?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्टालिन और अन्य दक्षिण भारतीय नेता परिसीमन के खिलाफ कितनी मजबूती से अपनी बात रख पाते हैं। क्या केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कोई बदलाव करेगी या फिर दक्षिण भारतीय राज्यों को अपनी राजनीतिक स्थिति बचाने के लिए नया रास्ता तलाशना होगा? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।
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