दिल्ली हिंसा मामला...उमर खालिद और शरजील कोर्ट को ने नहीं दी जमानत, अन्य आरोपियों को मिली राहत

दिल्ली हिंसा मामला...उमर खालिद और शरजील कोर्ट को ने नहीं दी जमानत, अन्य आरोपियों को मिली राहत

Delhi Violence Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 5 जनवरी, 2025 को फरवरी, 2020 में हुई दिल्ली हिंसा से जुड़े बड़े साजिश मामले में अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामले में सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों पर लगे आरोप गंभीर हैं और उनकी भूमिका अन्य आरोपियों से अलग और ज्यादा गंभीर मानी जा सकती है।

जमानत की शर्तें नहीं हुई पूरी

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम गुणात्मक रूप से अलग स्थिति में हैं। कोर्ट के मुताबिक, इस स्तर पर उनके खिलाफ मौजूद सामग्री उन्हें जमानत देने की अनुमति नहीं देती। अदालत ने साफ किया कि फिलहाल उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप बनते हैं और कानून के तहत जमानत की शर्तें पूरी नहीं होतीं।

क्यों मिली अन्य आरोपियों को जमानत?

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में 5 अन्य सह-आरोपियों को जमानत देने की अनुमति दी है। जिन लोगों को राहत मिली है, उनमें गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि इन पांचों की भूमिका को उमर खालिद और शरजील इमाम से अलग माना गया है और उनके खिलाफ आरोपों की प्रकृति भी अलग है।

कोर्ट ने क्या कहा?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर 2025 को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह याचिकाएं दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती देती थीं, जिसमें सभी आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार असीमित नहीं हो सकता और यदि इससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, तो उस पर रोक लगाई जा सकती है।

53 लोगों की हुई थी मौत

दिल्ली हाई कोर्ट ने ये भी माना था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत प्रथम दृष्टया ये संकेत देते हैं कि फरवरी, 2020 की हिंसा के पीछे एक संगठित साजिश थी। इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इसी कथित साजिश के तहत उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका को अहम बताया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि उसने सभी आरोपियों को एक ही नजर से नहीं देखा है। अदालत ने कहा कि हर आरोपी की भूमिका अलग-अलग है और जमानत पर फैसला करते समय उसी आधार पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि सभी आरोपी समान स्तर पर दोषी नहीं माने जा सकते। फैसले के दौरान पीठ ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले में कानून के तहत तय की गई सख्त शर्तें लागू होती हैं। इस वजह से उन्हें फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती। वहीं, अन्य पांच आरोपियों के मामले में अदालत ने राहत देने का फैसला किया।

मामले के ट्रायल पर सभी की नजरें

इस फैसले के बाद दिल्ली हिंसा मामले में एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज होने की संभावना है। जहां एक ओर उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत न मिलने से उनके समर्थकों में निराशा है, वहीं पांच आरोपियों को जमानत मिलने को अहम कदम माना जा रहा है। अब इस मामले में आगे की सुनवाई और ट्रायल पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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