
Delhi News: दिल्ली सरकार ने आज नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनएसयूटी) के परिसर में दिल्ली स्टार्टअप युवा महोत्सव 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सरकार ने छात्र उद्यमिता को बढ़ावा देने और दिल्ली को भारत की स्टार्टअप राजधानी के रूप में स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
छात्रों, मेंटर्स, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए माननीय शिक्षा मंत्रीआशीष सूद ने कहा कि एनएसयूटी जैसे संस्थान केवल शैक्षणिक शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि नवाचार और राष्ट्र निर्माण के सशक्त केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि आज के छात्र ‘विकसित भारत’ के शिल्पकार हैं और यह महोत्सव एक परिवर्तनकारी “कैंपस से मार्केट” आंदोलन की शुरुआत है।
भारत की स्टार्टअप यात्रा पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014से पहले भारत में केवल तीन यूनिकॉर्न थे और स्टार्टअप इकोसिस्टम सीमित था। आज भारत में लगभग 125यूनिकॉर्न हैं, जिनका संयुक्त मूल्यांकन 366अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। इसके साथ ही देश में 1.97लाख से अधिक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘नीतिगत ठहराव’ से ‘नीतिगत कार्रवाई’ की ओर हुए निर्णायक बदलाव को दिया।
सूद ने भारत के स्टार्टअप विकास की समावेशी प्रकृति पर भी जोर दिया और बताया कि आज लगभग 45प्रतिशत भारतीय स्टार्टअप महिलाओं के नेतृत्व में हैं। उन्होंने उद्यमिता को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। यह परिवर्तन गहरे सामाजिक बदलाव की भी कहानी है। इस दौर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में हमारी समावेशन की कहानी शामिल है। यह वह तथ्य है जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अक्सर रेखांकित करते हैं, यह दिखाने के लिए कि उद्यमिता सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त उपकरण है। जब भारत की कोई बेटी स्टार्टअप शुरू करती है, तो वह केवल अपना जीवन नहीं बदलती, बल्कि अपने परिवार और समुदाय का भविष्य भी बदल देती है।
इस राष्ट्रीय गति से प्रेरणा लेते हुए सूद ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार, दिल्ली को छात्र नवाचार की राजधानी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्टार्टअप युवा महोत्सव एक प्रमुख वार्षिक मंच के रूप में विकसित होगा, जो विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, आईआईटी, मेंटर्स, निवेशकों और उद्योग जगत को एक छत के नीचे लाकर एक मजबूत “कैंपस से मार्केट” इकोसिस्टम तैयार करेगा।
शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान में दिल्ली सरकार द्वारा समर्थित उद्यमिता कार्यक्रमों के तहत 75,000से अधिक छात्र और युवा नवप्रवर्तक जुड़े हुए हैं, जिनकी वार्षिक वृद्धि दर 30प्रतिशत है। स्वास्थ्य, सतत विकास और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 470से अधिक स्टार्टअप्स का इनक्यूबेशन किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप अपने पहले वर्ष में औसतन 4–5प्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर रहे हैं और सामूहिक रूप से ₹500–600करोड़ तक का राजस्व अर्जित कर रहे हैं।
सूद ने घोषणा की कि दिल्ली सरकार ₹325करोड़ के प्रस्तावित परिव्यय के साथ पांच वर्षों के लिए दिल्ली स्टार्टअप नीति 2025लाने का प्रस्ताव कर रही है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2035तक 5,000स्टार्टअप्स को समर्थन देना है। इसके अंतर्गत दिल्ली स्टूडेंट सीड फंड की स्थापना की जा रही है, ताकि प्रारंभिक चरण में वित्तीय संसाधनों के अभाव में कोई भी नवाचारी विचार विफल न हो। इस कार्यक्रम के तहत शीर्ष छह स्टार्टअप्स को ₹10लाख तक का इक्विटी-फ्री सीड ग्रांट दिया जाएगा, जबकि शीर्ष 100छात्र स्टार्टअप्स को ₹1लाख प्रत्येक की सहायता प्रदान की जाएगी।
छात्रों को सार्थक नवाचार के लिए प्रेरित करते हुए मंत्रीआशीष सूद ने कहा कि किसी विचार का मूल्य इस बात में नहीं है कि वह कितना सुरक्षित है, बल्कि इस बात में है कि वह कितना अर्थपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत का अगला यूनिकॉर्न किसी हॉस्टल रूम, प्रयोगशाला या एनएसयूटी जैसे किसी कैंपस से भी निकल सकता है।
दिल्ली के युवाओं से इस परिवर्तन का नेतृत्व करने का आह्वान करते हुए सूद ने कहा कि दिल्ली को भारत की स्टार्टअप राजधानी घोषणा से नहीं, बल्कि अपने युवा नवप्रवर्तकों की उपलब्धियों और उद्यमशीलता से बनना चाहिए।उत्साहपूर्ण भागीदारी के बीच छात्रों, मेंटर्स, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत की मौजूदगी में दिल्ली स्टार्टअप युवा महोत्सव 2026 को औपचारिक रूप से आरंभ घोषित किया गया।
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