Delhi Electricity Subsidy:दिल्ली में बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले लाखों उपभोक्ताओं के लिए अहम खबर है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने बिजली सब्सिडी योजना का फायदा उठाने के लिए आधार नंबर का प्रमाण देना अनिवार्य कर दिया है। दिल्ली सरकार के बिजली विभाग की 30 सितंबर 2026 की अधिसूचना के मुताबिक, यह नियम सरकारी राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी हो गया है। इसके तहत सब्सिडी लेने के इच्छुक उपभोक्ताओं को आधार नंबर का प्रमाण देना होगा या निर्धारित प्रक्रिया के तहत आधार प्रमाणीकरण कराना होगा।
सरकार की अधिसूचना के अनुसार, बिजली सब्सिडी के लाभार्थियों को वेब पोर्टल या सरकार की ओर से निर्धारित किसी अन्य माध्यम से आधार नंबर का प्रमाण देना होगा। जिन लोगों को अभी तक आधार नंबर जारी नहीं हुआ है, वे आधार के लिए नामांकन आवेदन की 14 अंकों वाली Enrolment ID के जरिए भी सब्सिडी का लाभ लेने के लिए अपनी जानकारी जमा कर सकते हैं। बिजली विभाग और संबंधित एजेंसियों को इस नई व्यवस्था के बारे में उपभोक्ताओं को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
बिजली सब्सिडी पर हजारों करोड़ रुपये खर्च, सरकार का क्या है मकसद?
दिल्ली में बिजली सब्सिडी सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 तक बिजली सब्सिडी के लिए आवंटन 4,037.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस मद में 3,500 करोड़ रुपये का बजट रखा गया। सरकार का कहना है कि आधार आधारित पहचान से लाभार्थियों की पहचान बेहतर ढंग से सुनिश्चित करने और सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, नई व्यवस्था से प्रत्येक उपभोक्ता पर क्या असर पड़ेगा, यह संबंधित योजना के नियमों और लागू प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
बिजली कंपनियों के ऑडिट पर भी नजर, उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है मामला?
दिल्ली सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय मामलों की जांच को लेकर भी कदम उठाए हैं। जुलाई 2026 में बिजली वितरण कंपनियों की करीब 38,500 करोड़ रुपये की नियामकीय परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों की जांच के लिए ऑडिट का आदेश दिया गया था। इस प्रक्रिया में कानूनी और नियामकीय पहलू भी सामने आए हैं, इसलिए ऑडिट की मौजूदा स्थिति को लेकर नवीनतम आधिकारिक जानकारी देखना जरूरी है। बिजली सब्सिडी में आधार पहचान और बिजली कंपनियों के वित्तीय मामलों की जांच, दोनों ही दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं।
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