
Hisar News: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने हांसी में आयोजित सम्मान समारोह में अपने बचपन और न्यायिक सफर की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि हांसी उनके बचपन की यादों से जुड़ा शहर है। पिता के साथ उन्होंने पहली बार हांसी के सिनेमाघर में फिल्म देखी थी। सीजेआई ने अपनी वकालत करियर की शुरुआत का भी विवरण शेयर किया। 20 अप्रैल 1984 को उनकी लॉ की अंतिम परीक्षा थी और 21 अप्रैल 1984 से उन्होंने हिसार कोर्ट में वकालत शुरू की। 29 जुलाई 1984 को उन्हें वकालत का लाइसेंस मिला। इसके बाद उन्होंने हिसार के नामी वकीलों के साथ चंडीगढ़ उच्च न्यायालय में भी काम किया। उन्होंने बताया कि एक बार नामी वकील के सामने केस की बहस के बाद जज ने उन्हें उच्च न्यायालय में भेजने की सलाह दी।
सीजेआई हुए भावुक
समारोह में सीजेआई ने मंच पर बैठे जजों, बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अपनी पत्नी सविता का नाम विशेष रूप से लिया। उन्होंने कहा कि कहीं नाम लेने में चूक न हो इसलिए सभी को याद किया। स्थानीय लोक निर्माण विश्राम गृह में सीजेआई को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बार एसोसिएशन के प्रधान पवन रापड़िया ने उन्हें भगवान श्रीराम की मूर्ति भेंट की, जबकि डीसी डॉ. राहुल नरवाल ने उनका चित्र भेंट किया। एसडीएम राजेश खोथ ने सीजेआई के पिता मदन गोपाल शास्त्री की हाथ से बनी फोटो भेंट की, जिसे देखकर सीजेआई भावुक हो गए।
हरियाणा में न्यायिक व्यवस्था का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर- सीजेआई
सीजेआई ने कहा कि हांसी मेरी जन्म और कर्मभूमि है। शपथ ग्रहण के समय भी हांसी के वकील और परिवार के सदस्य मौजूद थे। उन्होंने हांसी को जिला बनाए जाने की पुरानी मांग पूरी होने पर सभी को बधाई दी। वकीलों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले कोर्ट परिसर में सुविधाएं बहुत सीमित थीं। महिला वकीलों के लिए शौचालय और बैठने की व्यवस्था नहीं थी। धीरे-धीरे देश और हरियाणा में न्यायिक व्यवस्था का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हुआ है। उन्होंने सभी कोर्ट परिसर में प्रगति और बढ़ती न्यायिक जिम्मेदारियों के अनुसार और सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सूर्यकांत की ये यात्रा हांसी वासियों के लिए गर्व का क्षण रही, जहां उन्होंने बचपन से लेकर सीजेआई बनने तक का सफर साझा किया।
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