Opposition Protest:विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात की कोशिश को झटका लगा है। मुख्य न्यायाधीश ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर मुलाकात करने से इनकार कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने इस संबंध में राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने मुलाकात से इनकार करने की वजह न्यायिक परंपराओं और अदालत के प्रोटोकॉल को बताया है। विपक्षी नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और फॉर्म-6 से जुड़े विवाद पर अपनी चिंताओं को मुख्य न्यायाधीश के सामने रखना चाहते थे।
INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और फॉर्म-6 से जुड़े मुद्दों पर मुख्य न्यायाधीश से चर्चा करना चाहते थे। विपक्ष की ओर से इन प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन मुद्दों से संबंधित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण व्यक्तिगत मुलाकात को लेकर न्यायिक मर्यादा का सवाल सामने आया। न्यायिक परंपरा के अनुसार, न्यायाधीशों को विचाराधीन मामलों में किसी राजनीतिक दल या संबंधित पक्ष के साथ निजी तौर पर चर्चा करने से बचना चाहिए। इसका उद्देश्य निष्पक्षता बनाए रखना और न्यायिक प्रक्रिया में सभी पक्षों के प्रति समान व्यवहार सुनिश्चित करना है।
राहुल गांधी को पत्र लिखकर CJI ने क्या बताया?
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि अदालत के समक्ष लंबित मामलों पर व्यक्तिगत मुलाकात के जरिए चर्चा करना उचित नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि न्याय पाने के लिए अदालत के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। यदि किसी पक्ष को किसी मुद्दे पर आपत्ति या शिकायत है, तो वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत याचिका दायर कर सकता है। अदालत नियमों के अनुसार उस पर विचार करेगी। इस तरह मुख्य न्यायाधीश ने विपक्ष की चिंताओं को अदालत की औपचारिक प्रक्रिया के जरिए उठाने का रास्ता बताया है।
1997 की न्यायिक आचार संहिता में भी है स्पष्ट प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट द्वारा 7 मई 1997 को अपनाए गए न्यायिक आचरण संबंधी सिद्धांतों में न्यायाधीशों से पद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने की अपेक्षा की गई है। इन सिद्धांतों के तहत न्यायाधीशों को सार्वजनिक बहस में शामिल होने और राजनीतिक या न्यायिक निर्णय के लिए लंबित मामलों पर सार्वजनिक रूप से विचार व्यक्त करने से बचना चाहिए। इसका मकसद न्यायपालिका की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता को कायम रखना है। ऐसे में सीजेआई सूर्यकांत का मुलाकात से इनकार करना न्यायिक प्रक्रिया और स्थापित परंपराओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच SIR और फॉर्म-6 से जुड़े विवाद पर आगे की कार्रवाई अब संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए होने की संभावना है।
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