इजरायल-ईरान युद्ध का भारत पर प्रभाव, अर्थव्यवस्था…व्यापार और नौकरियों में क्या होगा बुरा असर?

इजरायल-ईरान युद्ध का भारत पर प्रभाव, अर्थव्यवस्था…व्यापार और नौकरियों में क्या होगा बुरा असर?

नई दिल्ली- ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित होने लगी हैं। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जबकि भारतीय शेयर बाजार में नकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है। बीएसई सेंसेक्स ने कारोबार के दौरान 1,600अंक से अधिक की गिरावट दर्ज की, और निफ्टी में भी 500अंक से ज्यादा की कमी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच युद्ध होता है, तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर व्यापक रूप से पड़ेगा।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को खतरा

भारत के लिए इस संघर्ष का सबसे गंभीर मुद्दा ऊर्जा सुरक्षा है, क्योंकि देश अपनी तेल आवश्यकता का 85%आयात करता है। ईरान रोजाना लगभग 30लाख बैरल कच्चा तेल उत्पादित करता है, और दुनिया की 20%तथा भारत की 60%ऑयल सप्लाई होरमूज की खाड़ी से होती है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 80डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इससे भारत का व्यापार घाटा, चालू खाता घाटा और राजकोषीय घाटा प्रभावित हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संभावित असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान के बंदरगाहों पर हमले होते हैं, तो इसका वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर होगा। ईरान फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और कैस्पियन सागर में स्थित है। इस संघर्ष से भारत का एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट दोनों प्रभावित हो सकते हैं। भारत सऊदी अरब और इराक से कच्चे तेल का बड़ा आयात करता है। हाल ही में लाल सागर में जहाजों पर हुए हमलों के कारण पहले ही फ्रेट कॉस्ट में वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय निर्यातकों की समस्याएँ बढ़ सकती हैं।

रोजगार पर प्रभाव

अगर ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर भारत में रोजगार पर भी देखने को मिल सकता है। बड़ी संख्या में भारतीय कामगार पश्चिम एशियाई देशों में नौकरी के लिए जाते हैं, और यदि उन्हें स्वदेश लौटना पड़ा, तो इससे नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। भारतीय कामगार वहाँ अलग परिस्थितियों में रहते हैं और सालाना सात लाख रुपये तक बचाते हैं, जो भारत में संभव नहीं है।

बढ़ती चिंताएँ और संभावित समाधान

ईरान-इजरायल तनाव का असर केवल आर्थिक स्तर पर नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी भारत को प्रभावित कर सकता है। इन हालातों में, भारत को अपनी ऊर्जा नीति और विदेशी व्यापार रणनीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है, ताकि इस संकट के प्रभावों को कम किया जा सके। देश की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भारत वैश्विक बाजार में एक स्थायी और सुरक्षित स्थिति बनाए रख सके।

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