
Income Tax: 1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष 2024-25 शुरू हो गया है। ऐसे में लोगों को नई टैक्स व्यवस्था और पुरानी टैक्स व्यवस्था में से किसी एक को चुनना होगा। यदि आप किसी कर व्यवस्था का चयन नहीं करते हैं, तो डिफ़ॉल्ट रूप से नई कर व्यवस्था स्वचालित रूप से चुनी जाएगी।
ऐसे में कई लोग सोच रहे हैं कि पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में क्या अंतर है। आज इस आर्टिकल में हम आपको उन बिंदुओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपको टैक्स व्यवस्था चुनने में मदद कर सकते हैं।
नई टैक्स रिजीम VS पुरानी टैक्स रिजीम
1- नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में सबसे बड़ा अंतर यह है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था में आपको 80C, 80D, 80TTA के तहत कई तरह की इनकम टैक्स छूट मिलती है। वहीं, नई टैक्स व्यवस्था में ऐसी कोई छूट नहीं मिलती है। अगर आप टैक्स छूट का फायदा लेना चाहते हैं तो पुरानी टैक्स व्यवस्था आपके लिए बेहतर रहेगी।
2- नई टैक्स व्यवस्था में छूट के तौर पर सिर्फ 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन ही मिलता है। हालांकि, पुरानी टैक्स व्यवस्था में नौकरीपेशा लोगों को भी यह लाभ मिलता है।
3- नई टैक्स व्यवस्था के तहत 7.5 लाख रुपये की आय टैक्स छूट के दायरे में आती है। इसमें 6 से 9 लाख की आय पर 10 प्रतिशत, 9 से 12 लाख की आय पर 15 प्रतिशत, 12 से 15 लाख की आय पर 20 प्रतिशत और 15 लाख से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत की छूट मिलती है।
4- पुरानी टैक्स व्यवस्था में 5 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री है। वहीं 5 से 10 लाख रुपये की आय पर 20 फीसदी और 10 लाख रुपये से ज्यादा की आय पर 30 फीसदी टैक्स लगता है।
5- अगर आप इनकम टैक्स भरते समय किसी भी टैक्स व्यवस्था का चयन नहीं करते हैं तो नई टैक्स व्यवस्था का चयन अपने आप हो जाएगा और आपको उसी हिसाब से टैक्स जमा करना होगा।
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